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धर्मनगरी को अपनी जकड़ में कस रही ट्यूबरक्लोसिसि
Sat, 23 Mar 2019 11:19 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: अलका त्यागी
Updated Sat, 23 Mar 2019 11:19 PM IST
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Tuberculosis
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धर्मनगरी में हर साल टीबी के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हरिद्वार में बीते चार वर्षों में लगभग 454 लोग टीबी से अपनी जान गवां चुके हैं। बढ़ते नशे और बदलती जीवन शैली के कारण हर वर्ग का व्यक्ति टीबी की चपेट में आ रहा है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना मुख्य कारण माना जा रहा है। वहीं सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकांश लोग आज भी टीबी के प्रति जागरूक नहीं हैं।
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टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) एक प्रकार की संक्रामक बीमारी है, जो आमतौर पर फेफड़ों पर हमला करती है। टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है, जो दिमाग और रीढ़ तक भी पहुंच जाती है। टीबी का समय पर इलाज न होने से ये मौत का भी एक कारण बन जाती है। धर्मनगरी हरिद्वार भी टीबी की जकड़ में है। वर्ष 2015 में जनपद में टीबी के मरीजों की संख्या 2778 थी, जो 2018 में बढ़कर 4838 हो गई है। इनमें से हर साल तीन प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में 83, 2016 में 86, 2017 में 140 और वर्ष 2018 में 145 टीबी के मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि टीबी के अधिकांश मरीजों में मलिन बस्तियों में रहने वाले और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले शामिल हैं, लेकिन मध्य वर्ग और अमीर वर्ग भी इससे अछूता नहीं है और हरिद्वार के शहरी इलाके में भी गई लोग टीबी की जकड़ मेें हैं। टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है, ये स्थिति तब है जब सरकार टीबी के खिलाफ तमाम अभियान चला रही है।
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टीबी का समय पर इलाज न कराए तो उससे कई अन्य लोगों में टीबी का संक्रमण फैल सकता है। संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए समय पर इलाज जरूरी है। टीबी के कोई भी लक्षण दिखने पर क्षय रोग केंद्रों पर जांच अवश्य कराएं। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन बंद करना होगा। नियमित रूप से व्यायाम भी सेहत के लाभकारी सिद्ध होगा। पर्याप्त सफाई व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।
- डॉ. अजय कुमार, वरिष्ठ जिला क्षय रोग अधिकारी, हरिद्वार।