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Bageshwar News: शिक्षकों के विवादित तबादलों की 13 दिन बाद भी जांच अधर में, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Thu, 17 Sep 2026 12:55 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 17 Sep 2026 12:55 AM IST
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बागेश्वर। प्राथमिक शिक्षा विभाग में हाल ही में संपन्न हुई शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया में विसंगतियों और धांधली के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। तबादला प्रक्रिया में उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के उल्लंघन और पोर्टल से सुगम-दुर्गम के रिक्त स्कूलों के विकल्प गायब करने के गंभीर आरोपों के बीच अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से शिक्षकों में भारी रोष है।
मामले में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और डीएम अपूर्वा पांडेय की ओर से सीईओ को जांच के स्पष्ट निर्देश दिए 13 दिन का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन जांच प्रक्रिया अब तक ठंडे बस्ते में नजर आ रही है। न तो डीएम स्तर से कोई अंतिम कार्रवाई हुई है और ना ही सीईओ स्तर से आख्या प्रस्तुत की गई है। प्रशासनिक हीलाहवाली से परेशान प्रभावित शिक्षकों ने अब विभाग को दूसरा रिमाइंडर भी सौंप दिया है। इतने लंबे समय तक मामले में कोई प्रत्युत्तर न मिलने और जांच पूरी न होने से जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय गवाड़, पंद्रहपाली और द्यांगण जैसे स्कूलों को सार्वजनिक रिक्त सूची में दर्शाने के बाद आवेदन के समय पोर्टल से हटा दिया गया। इसके अलावा पति-पत्नी श्रेणी और गंभीर बीमारी/दिव्यांगता श्रेणी के वरिष्ठ आवेदकों को दरकिनार कर चहेतों को लाभ देने के गंभीर आरोप हैं।
.......इनसेट
जांच की सुस्त रफ्तार पर उठ रहे तीन बड़े सवाल
जब सीईओ कार्यालय से जांच की आख्या डीएम कार्यालय को भेज दी गई तो अब तक शिक्षकों के रिमाइंडर का जवाब क्यों नहीं?
प्रभावित शिक्षकों की ओर से लगातार दूसरा स्मरण पत्र दिए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग मौन क्यों साधे हुए है?
समय पर जांच रिपोर्ट न आने से सवाल उठ रहा है कि क्या गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बचाने के लिए मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है?
.......कोट
शिक्षकों के स्थानांतरण में विसंगतियों और पोर्टल संबंधी शिकायतों को लेकर प्राप्त प्रत्यावेदन को बेहद गंभीरता से लिया गया है। मामले की निष्पक्ष और जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सीईओ बागेश्वर को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नियमानुसार जांच पूरी कराकर प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा।
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.....ज्योति यादव सचिव, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड
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मामले में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और डीएम अपूर्वा पांडेय की ओर से सीईओ को जांच के स्पष्ट निर्देश दिए 13 दिन का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन जांच प्रक्रिया अब तक ठंडे बस्ते में नजर आ रही है। न तो डीएम स्तर से कोई अंतिम कार्रवाई हुई है और ना ही सीईओ स्तर से आख्या प्रस्तुत की गई है। प्रशासनिक हीलाहवाली से परेशान प्रभावित शिक्षकों ने अब विभाग को दूसरा रिमाइंडर भी सौंप दिया है। इतने लंबे समय तक मामले में कोई प्रत्युत्तर न मिलने और जांच पूरी न होने से जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि राजकीय प्राथमिक विद्यालय गवाड़, पंद्रहपाली और द्यांगण जैसे स्कूलों को सार्वजनिक रिक्त सूची में दर्शाने के बाद आवेदन के समय पोर्टल से हटा दिया गया। इसके अलावा पति-पत्नी श्रेणी और गंभीर बीमारी/दिव्यांगता श्रेणी के वरिष्ठ आवेदकों को दरकिनार कर चहेतों को लाभ देने के गंभीर आरोप हैं।
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जांच की सुस्त रफ्तार पर उठ रहे तीन बड़े सवाल
जब सीईओ कार्यालय से जांच की आख्या डीएम कार्यालय को भेज दी गई तो अब तक शिक्षकों के रिमाइंडर का जवाब क्यों नहीं?
प्रभावित शिक्षकों की ओर से लगातार दूसरा स्मरण पत्र दिए जाने के बावजूद शिक्षा विभाग मौन क्यों साधे हुए है?
समय पर जांच रिपोर्ट न आने से सवाल उठ रहा है कि क्या गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बचाने के लिए मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है?
.......कोट
शिक्षकों के स्थानांतरण में विसंगतियों और पोर्टल संबंधी शिकायतों को लेकर प्राप्त प्रत्यावेदन को बेहद गंभीरता से लिया गया है। मामले की निष्पक्ष और जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सीईओ बागेश्वर को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नियमानुसार जांच पूरी कराकर प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं का शीघ्र निस्तारण किया जाएगा।
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.....ज्योति यादव सचिव, विद्यालयी शिक्षा उत्तराखंड