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जैकेट ने रोका युवाओं का पलायन
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Sat, 28 Nov 2015 12:29 AM IST
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जिले के नौगावां सादात कस्बे में बनी जैकेट पूरे देश में लोगों को ठंड से
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बचा रही है। जैकेट के कारोबार ने युवाओं को नगर में ही रोजगार मुहैया कराने
का काम किया है। बस्ती में करीब 150 जैकेट फैक्ट्रियां चल रही हैं।
इनमें फैक्ट्री चलाने वाले से लेकर कपड़ा काटने वाले, सिलाई करने वाले और तैयार जैकेट की लोडिंग करने वाले सभी युवा 18 से 40 वर्ष के हैं। दो साल पहले तक नौगवां बस्ती सूनी-सूनी दिखाई देती थी, क्योंकि हर घर से युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली मुंबई, चंड़ीगढ़, अहमदाबाद, कोलकाता जैसे शहरों में रहते थे।
घर से बाहर रहकर उन्हें इतनी बचत नहीं होती थी। लेकिन दो साल में नौगावां सादात में जैकेट के कारोबार ने युवाओं की तकदीर बदल दी है। यही नहीं लड़कियां भी जैकेट की सिलाई कर रही हैं। वह एक दिन में पांच सौ से डेढ़ हजार रुपये तक कमा रहे हैं। दिन रात मशीनों पर काम चल रहा है। एक फैक्ट्री एक सीजन में एक से डेढ़ लाख जैकेट तक तैयार करके भेज रही हैं।
इनमें फैक्ट्री चलाने वाले से लेकर कपड़ा काटने वाले, सिलाई करने वाले और तैयार जैकेट की लोडिंग करने वाले सभी युवा 18 से 40 वर्ष के हैं। दो साल पहले तक नौगवां बस्ती सूनी-सूनी दिखाई देती थी, क्योंकि हर घर से युवा रोजगार की तलाश में दिल्ली मुंबई, चंड़ीगढ़, अहमदाबाद, कोलकाता जैसे शहरों में रहते थे।
घर से बाहर रहकर उन्हें इतनी बचत नहीं होती थी। लेकिन दो साल में नौगावां सादात में जैकेट के कारोबार ने युवाओं की तकदीर बदल दी है। यही नहीं लड़कियां भी जैकेट की सिलाई कर रही हैं। वह एक दिन में पांच सौ से डेढ़ हजार रुपये तक कमा रहे हैं। दिन रात मशीनों पर काम चल रहा है। एक फैक्ट्री एक सीजन में एक से डेढ़ लाख जैकेट तक तैयार करके भेज रही हैं।