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रसूले खुदा की जिंदगी कयामत तक नमूना
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 22 Dec 2015 12:12 AM IST
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मुस्लिम कमेटी के बैनर तले सोमवार की रात जलसा-ए-सीरते का नौवां जलसा नौबतखाना के अहसान चौक पर आयोजित हुआ। इसका आगाज कुराने पाक की नात से हुआ।
जलसे को खिताब करते मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान ने फरमाया कि मोहसिने इंसानियत हजरत मोहम्मद मुस्तफा पर अल्लाह ने कुराने करीम नाजिल फरमाई और उस पर खुद अमल करके दिखाया।
अल्लाह का यह आखिरी पैगाम है कि जो उसने अपने हबीब हजरत मोहम्मद साहब के जरिए दुनिया में भेजकर दुनिया के आखिरी नबी और रसूल होने का एलान किया। इसी तरह अल्लाह का कलाम कुरान की सूरत में कयामत तक के लिए भेजा गया है।
उन्होंने कहा कि रसूले पाक की सीरत कुराने करीम की मुकम्मल तफसीर है। कुरान शरीफ का पढ़ना, सुनना, छूना इबादत है। अल्लाह फरमाता है कि कयामत तक हमारे रसूल की जिंदगी तुम्हारे लिए नमूना है। उन्होंने फरमाया कि तलाक देना तो बहुत आसान है, लेकिन ऐसा तभी करें जब हालात काबू से बाहर हो जाएं।
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इसी तरह अल्लाह ने फरमाया कि बिना वजह जो औरत अपने शौहर से तलाक का सवाल करे उस पर जन्नत की खुशबू भी हराम है। दुआ के बाद जलसे का समापन हुआ। मौलाना मोहम्मद इस्माइल, जुबैर सैफी, साजिद खां, नौशाद अली, नवाब अहमद आदि मौजूद रहे। सदारत मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष हाजी खुर्शीद अनवर और निजामत असलम उस्मानी व इकबाल अहमद खां ने संयुक्त रूप से की।
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जलसे को खिताब करते मुफ्ती मोहम्मद अफ्फान ने फरमाया कि मोहसिने इंसानियत हजरत मोहम्मद मुस्तफा पर अल्लाह ने कुराने करीम नाजिल फरमाई और उस पर खुद अमल करके दिखाया।
अल्लाह का यह आखिरी पैगाम है कि जो उसने अपने हबीब हजरत मोहम्मद साहब के जरिए दुनिया में भेजकर दुनिया के आखिरी नबी और रसूल होने का एलान किया। इसी तरह अल्लाह का कलाम कुरान की सूरत में कयामत तक के लिए भेजा गया है।
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उन्होंने कहा कि रसूले पाक की सीरत कुराने करीम की मुकम्मल तफसीर है। कुरान शरीफ का पढ़ना, सुनना, छूना इबादत है। अल्लाह फरमाता है कि कयामत तक हमारे रसूल की जिंदगी तुम्हारे लिए नमूना है। उन्होंने फरमाया कि तलाक देना तो बहुत आसान है, लेकिन ऐसा तभी करें जब हालात काबू से बाहर हो जाएं।
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इसी तरह अल्लाह ने फरमाया कि बिना वजह जो औरत अपने शौहर से तलाक का सवाल करे उस पर जन्नत की खुशबू भी हराम है। दुआ के बाद जलसे का समापन हुआ। मौलाना मोहम्मद इस्माइल, जुबैर सैफी, साजिद खां, नौशाद अली, नवाब अहमद आदि मौजूद रहे। सदारत मुस्लिम कमेटी के अध्यक्ष हाजी खुर्शीद अनवर और निजामत असलम उस्मानी व इकबाल अहमद खां ने संयुक्त रूप से की।