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वो जिंदगी की राह से होकर गुजर गए..
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Sun, 25 Oct 2015 01:02 AM IST
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ललित निबंधकार एवं शिक्षाविद डॉ. रामअवध शास्त्री की स्मृति में आवास विकास कॉलोनी में काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने काव्य पाठ करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
डा. संयुक्ता चौहान ने डा.राम अवध शास्त्री के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, उनकी सेवाओं को हम कभी नहीं भुला सकेंगे। उन्होंने ललित निबंध के बल पर साहित्य को समृद्घ किया। डा. वंदना रानी गुप्ता ने उन्हें श्रद्घासुमन अर्पित किए।
चंद्रपाल यांत्री ने पढ़ा, मैंने अच्छा आदमी का नाटक क्या-क्या नहीं किया, फिर भी इस पब्लिक ससुरी ने मुझे हरा दिया। चमन लाल ने पढ़ा कि अपनी कलम से किया आपने सही दिशा देने का काम।
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हरिओम तोमर ने पढ़ा कि, वो जिंदगी की राह से होकर गुजर गए, अश्कों का एक समंदर आंखों में भर गए। शंकर अमरोही ने अपनी कविताओं के माध्यम से उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
अमर कांत शर्मा ने पढ़ा कि मैं अज्ञानी तुमसे ज्ञानी को क्या भुला कुछ पाउंगा। नरेंद्र त्रिवेदी भावुक ने पढ़ा कि वह भी रह गया पत्थर होकर जिसने दुनिया में बनाए पत्थर। सतेंद्र धारीवाल ने पढ़ा जलता है वतन, तो कलम रोती है। अकरम शाह खां ने भी कलाम पढ़ा।
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डा. संयुक्ता चौहान ने डा.राम अवध शास्त्री के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, उनकी सेवाओं को हम कभी नहीं भुला सकेंगे। उन्होंने ललित निबंध के बल पर साहित्य को समृद्घ किया। डा. वंदना रानी गुप्ता ने उन्हें श्रद्घासुमन अर्पित किए।
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चंद्रपाल यांत्री ने पढ़ा, मैंने अच्छा आदमी का नाटक क्या-क्या नहीं किया, फिर भी इस पब्लिक ससुरी ने मुझे हरा दिया। चमन लाल ने पढ़ा कि अपनी कलम से किया आपने सही दिशा देने का काम।
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हरिओम तोमर ने पढ़ा कि, वो जिंदगी की राह से होकर गुजर गए, अश्कों का एक समंदर आंखों में भर गए। शंकर अमरोही ने अपनी कविताओं के माध्यम से उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
अमर कांत शर्मा ने पढ़ा कि मैं अज्ञानी तुमसे ज्ञानी को क्या भुला कुछ पाउंगा। नरेंद्र त्रिवेदी भावुक ने पढ़ा कि वह भी रह गया पत्थर होकर जिसने दुनिया में बनाए पत्थर। सतेंद्र धारीवाल ने पढ़ा जलता है वतन, तो कलम रोती है। अकरम शाह खां ने भी कलाम पढ़ा।