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अमेरिका से शव पहुंचा, तिगरी में दी अंतिम विदाई
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Wed, 04 Nov 2015 12:09 AM IST
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अमेरिका में फंसा गांव अफजलपुर लूट निवासी शिक्षक जयप्रकाश सिंह के छोटे बेटे अभिषेक ग्रेवाल का शव चौदहवें दिन मंगलवार सुबह छह बजे गांव पहुंच गया।
इसकी खबर पर अभिषेक के शव के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया। यहां बदहवास परिजनों को देख सबकी आंखें नम हो गईं। बाद में तिगरी धाम पर आठ बजे के बाद नम आंखों से अभिषेक को अंतिम विदाई दी गई।
अभिषेक ग्रेवाल अमेरिका के शिकागो में टीसीएस कंपनी में बतौर मैनेजर नियुक्त थे। 21 अक्तूबर की रात अभिषेक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी और जिस कमरे में लाश थी उसे सील कर दिया गया थी।
उसी कमरे में अभिषेक का वीजा और पासपोर्ट बंद होने से शव भारत लाने में अड़चड़ हो गई थी। अभिषेक का शव अमेरिका में फंसे होने की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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इस पर सांसद कंवर सिंह तंवर ने विदेश मंत्री से वार्ता की, तब कागजी कार्रवाई तेज हुई। इसके बाद सोमवार रात शव दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डा लाया गया।
यहां से मंगलवार सुबह छह बजे इंश्योरेंस कंपनी की एंबुलेंस से शव गांव लाया गया। शव घर आने की सूचना पर सगे संबंधी और गांव के लोग अंतिम दर्शन के लिए घर पर जमा हो गए।
इधर, शव देख घर में कोहराम मच गया, हर आंख नम हो गई। वहीं अभिषेक की पत्नी रेनुका बदहवास हो गई। मां सुनीता देवी और बड़े भाई का भी रो-रोकर बुराहाल था। पिता की आंख से तो आंसू ही सूख गए थे।
पापा-पापा कहते रोती रही मासूम आराध्या
गजरौला। अभिषेक का शव जब घर के आंगन में रखा हुआ था तो अंतिम दर्शन के लिए आंगन से लेकर गली के नुक्कड़ तक लोगों की भीड़ लगी हुई थी। उस समय अभिषेक की दो वर्षीय बेटी आराध्या को कुछ समझ नहीं नहीं आ रहा था कि ये भीड़ क्यों लगी हुई है। वह एक महिला की गोद में बार-बार पापा-पापा कह कर रो रही थी।
सैन समाज ने शोक संवेदना जाहिर की
गजरौला। सैन समाज की रेलवे स्टेशन रोड पर बैठक हुई। बैठक में समाज के लोगों ने अभिषेक ग्रेवाल की मृत्यु पर दुख प्रकट किया। साथ ही दुखी परिवार को ढांढ़स बंधाने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। शोक सभा में डा. जितेंद्र सैन, शेखर सैन, उमेश कुमार सैन, सतपाल नेताजी, नेतराम सैन, भोलू सैन, यश सैन, रवि सैन, देवेंद्र सैन, मनेेज सैन, अजय शमा्र, नितिन कुमार सैन, कुलदीप सैन मौजूद रहे।
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इसकी खबर पर अभिषेक के शव के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया। यहां बदहवास परिजनों को देख सबकी आंखें नम हो गईं। बाद में तिगरी धाम पर आठ बजे के बाद नम आंखों से अभिषेक को अंतिम विदाई दी गई।
अभिषेक ग्रेवाल अमेरिका के शिकागो में टीसीएस कंपनी में बतौर मैनेजर नियुक्त थे। 21 अक्तूबर की रात अभिषेक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी और जिस कमरे में लाश थी उसे सील कर दिया गया थी।
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उसी कमरे में अभिषेक का वीजा और पासपोर्ट बंद होने से शव भारत लाने में अड़चड़ हो गई थी। अभिषेक का शव अमेरिका में फंसे होने की खबर को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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इस पर सांसद कंवर सिंह तंवर ने विदेश मंत्री से वार्ता की, तब कागजी कार्रवाई तेज हुई। इसके बाद सोमवार रात शव दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डा लाया गया।
यहां से मंगलवार सुबह छह बजे इंश्योरेंस कंपनी की एंबुलेंस से शव गांव लाया गया। शव घर आने की सूचना पर सगे संबंधी और गांव के लोग अंतिम दर्शन के लिए घर पर जमा हो गए।
इधर, शव देख घर में कोहराम मच गया, हर आंख नम हो गई। वहीं अभिषेक की पत्नी रेनुका बदहवास हो गई। मां सुनीता देवी और बड़े भाई का भी रो-रोकर बुराहाल था। पिता की आंख से तो आंसू ही सूख गए थे।
पापा-पापा कहते रोती रही मासूम आराध्या
गजरौला। अभिषेक का शव जब घर के आंगन में रखा हुआ था तो अंतिम दर्शन के लिए आंगन से लेकर गली के नुक्कड़ तक लोगों की भीड़ लगी हुई थी। उस समय अभिषेक की दो वर्षीय बेटी आराध्या को कुछ समझ नहीं नहीं आ रहा था कि ये भीड़ क्यों लगी हुई है। वह एक महिला की गोद में बार-बार पापा-पापा कह कर रो रही थी।
सैन समाज ने शोक संवेदना जाहिर की
गजरौला। सैन समाज की रेलवे स्टेशन रोड पर बैठक हुई। बैठक में समाज के लोगों ने अभिषेक ग्रेवाल की मृत्यु पर दुख प्रकट किया। साथ ही दुखी परिवार को ढांढ़स बंधाने की शक्ति प्रदान करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। शोक सभा में डा. जितेंद्र सैन, शेखर सैन, उमेश कुमार सैन, सतपाल नेताजी, नेतराम सैन, भोलू सैन, यश सैन, रवि सैन, देवेंद्र सैन, मनेेज सैन, अजय शमा्र, नितिन कुमार सैन, कुलदीप सैन मौजूद रहे।