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हजरत शाह विलायत के वालिदेन की कब्रें मिली!
Amroha
Updated Mon, 12 May 2014 05:31 AM IST
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अमरोहा। मीरा सराय में मस्जिद की खुदाई के दौरान बरसों पुरानी दो कब्रें मिली है। जिन्हेें हजरत शाह विलायत रहमतुल्लाह अलैह के वालिदेन की होने का दावा किया जा रहा है। जिसे लेकर रविवार को दिनभर गांव में लोगों को आने जाने का सिलसिला लगा रहा। कब्रों पर फातिहाख्वानी भी की गई।
बिजनौर मार्ग पर हजरत सैयद हुसैन शरफुद्दीन शाह विलायत रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह है। जिसे दुनियाभर में बिच्छू वाली जियारत के नाम से जाना और पहचाना जाता है। इस दरगाह करामात यह है कि यहां बिच्छू डंक नहीं मारते और सच्चे दिल से मांगी गई हर जायज मुराद पूरी होती है। तारीख के पन्नों में दर्ज इबारत के मुताबिक हजरत शाह विलायत 594 हिजरी व 1242 ई.में अपने वालिद सैयद अली बुजुर्ग व वालिदा के साथ ईराक के शहर वासित से यहां आए थे। जिसके बाद आपने मीरा सराय गांव में कयाम किया था। वालिद के इंतकाल के बाद सैयद मखदूम विलायत अमरोहा आ गए थे और आज जहां आपकी दरगाह है उसी जगह को कयाम के लिए पसंद किया था।
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बिजनौर मार्ग पर हजरत सैयद हुसैन शरफुद्दीन शाह विलायत रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह है। जिसे दुनियाभर में बिच्छू वाली जियारत के नाम से जाना और पहचाना जाता है। इस दरगाह करामात यह है कि यहां बिच्छू डंक नहीं मारते और सच्चे दिल से मांगी गई हर जायज मुराद पूरी होती है। तारीख के पन्नों में दर्ज इबारत के मुताबिक हजरत शाह विलायत 594 हिजरी व 1242 ई.में अपने वालिद सैयद अली बुजुर्ग व वालिदा के साथ ईराक के शहर वासित से यहां आए थे। जिसके बाद आपने मीरा सराय गांव में कयाम किया था। वालिद के इंतकाल के बाद सैयद मखदूम विलायत अमरोहा आ गए थे और आज जहां आपकी दरगाह है उसी जगह को कयाम के लिए पसंद किया था।
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