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Year Ender 2023: अतीक का अंत...दुजाना भी मिट्टी में मिला; 2023 में UP में देवरिया कांड समेत हुई ये बड़ी वारदात
Sat, 23 Dec 2023 02:30 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 23 Dec 2023 02:30 PM IST
सार
साल 2023 अब खत्म होने वाला है और 2024 आने वाला है। यूपी में साल 2023 में कई बड़ी वारदातें हुईं। ऐसी कई घटनाएं हुई जिन्होंने पूरे यूपी को झखझोर के रख दिया। आइए 2023 के कुछ बड़े आपराधिक मामलों के बारे में जानते हैं।
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Year Ender 2023
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Year Ender 2023: साल 2023 बीतने वाला है। पूरे साल में उत्तर प्रदेश कई ऐसे बड़े आपराधिक मामले सुर्खियों में आए, जिन्होंने हिलाकर रख दिया। कहीं पुलिस ने एनकाउंटर किया तो कहीं अपनों ने ही परिवार को मौत की नींद सुला दिया। कुछ मामलों ने पूरे यूपी को झकझोरकर रख दिया। आइए जानते हैं पांच ऐसे मामलों के बारे में।
अतीक और अशरफ की हत्या
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल की देर रात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी। रात साढ़े 10 बजे के बाद अतीक और अशरफ को उस वक्त गोली मारी गई जब वो दोनों मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गए थे। मीडियाकर्मी बनकर आए तीन हमलावरों ने दनादन गोलियां बरसाईं। एक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार भी इस घटना में घायल हुआ था। जैसे ही गोलियां चलने लगीं, वहां मौजूद पुलिस और अन्य लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। जैसे ही अतीक के सिर में पहली गोली लगी तो वह वहीं गिर गया। इसके बाद भी हमलावरों ने उसे ताबड़तोड़ आठ गोलियां मारी गईं।
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माफिया अतीक अहमद को इसी साल 28 मार्च को उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अतीक के साथ दो अन्य दिनेश पासी और सौलत हनीफ को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अतीक के भाई अशरफ समेत सात आरोपी दोष मुक्त करार दिए गए थे। एक बार सांसद, पांच बार विधायक रहे अतीक पर 44 साल पहले पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से अब तक उसके ऊपर 100 से अधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन पहली बार किसी मुकदमे में उसे दोषी ठहराया गया था।
देवरिया कांड से कांप उठे थे लोग
यूपी के देवरिया जिले में रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव में 2 अक्तूबर को सुबह छह बजे जमीन के विवाद में एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। इससे गुस्साए पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पक्ष के लोग दूसरे पक्ष के घर में घुसकर पति, पत्नी और उसकी तीन संतानों को गोली मारकर और धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या कर दी थी, जबकि एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे मरा हुआ समझकर हत्यारोपियों ने छोड़ दिया था। पूरी घटना में छह लोगों की हत्या हुई थी। इस घटना से यूपी की राजनीति में हलचल पैदा हो गई थी। घटना में दो दर्जन से अधिक लोगों पर नामजद एफआईआर हुआ और उनकी गिरफ्तारी भी हुई।
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अतीक और अशरफ की हत्या
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 15 अप्रैल की देर रात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी। रात साढ़े 10 बजे के बाद अतीक और अशरफ को उस वक्त गोली मारी गई जब वो दोनों मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गए थे। मीडियाकर्मी बनकर आए तीन हमलावरों ने दनादन गोलियां बरसाईं। एक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार भी इस घटना में घायल हुआ था। जैसे ही गोलियां चलने लगीं, वहां मौजूद पुलिस और अन्य लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। जैसे ही अतीक के सिर में पहली गोली लगी तो वह वहीं गिर गया। इसके बाद भी हमलावरों ने उसे ताबड़तोड़ आठ गोलियां मारी गईं।
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माफिया अतीक अहमद को इसी साल 28 मार्च को उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अतीक के साथ दो अन्य दिनेश पासी और सौलत हनीफ को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अतीक के भाई अशरफ समेत सात आरोपी दोष मुक्त करार दिए गए थे। एक बार सांसद, पांच बार विधायक रहे अतीक पर 44 साल पहले पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से अब तक उसके ऊपर 100 से अधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन पहली बार किसी मुकदमे में उसे दोषी ठहराया गया था।
देवरिया कांड से कांप उठे थे लोग
यूपी के देवरिया जिले में रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव में 2 अक्तूबर को सुबह छह बजे जमीन के विवाद में एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। इससे गुस्साए पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पक्ष के लोग दूसरे पक्ष के घर में घुसकर पति, पत्नी और उसकी तीन संतानों को गोली मारकर और धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या कर दी थी, जबकि एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे मरा हुआ समझकर हत्यारोपियों ने छोड़ दिया था। पूरी घटना में छह लोगों की हत्या हुई थी। इस घटना से यूपी की राजनीति में हलचल पैदा हो गई थी। घटना में दो दर्जन से अधिक लोगों पर नामजद एफआईआर हुआ और उनकी गिरफ्तारी भी हुई।
वेस्ट यूपी में खौफ का पर्याय बना था अनिल दुजाना
पश्चिमी यूपी का कुख्यात अनिल दुजाना चार मई को एसटीएफ की मुठभेड़ में मारा गया था। एसटीएफ और गौतमबुद्धनगर पुलिस को उसकी तलाश थी। कुख्यात अनिल दुजाना वेस्ट यूपी में खौफ का पर्याय बना हुआ था। उस पर लूट, हत्या, डकैती समेत 65 मुकदमे दर्ज थे। मेरठ में एसटीएफ के एसपी बृजेश सिंह के नेतृत्व में टीम ने उसे गंगनहर पर भोला की झाल पर चार मई को घेर लिया था। अनिल दुजाना ने एसटीएफ की टीम पर गोली चला दी, जवाबी फायरिंग में वह मारा गया। कुख्यात अनिल दुजाना वारदातों में प्रतिबंधित बोर के हथियारों का इस्तेमाल करता था। जब वो जेल से बाहर था तो उसके गैंग के पास एके 47 और .30 बोर, नाइन एमए जैसे प्रतिबंधित बोर वाले हथियार थे। वो दोनों हाथों से पिस्टल चलाता था। पिछले कुछ वर्षों में उसने सहारनपुर से नोएडा और इटावा से लेकर फैजाबाद तक अपना गिरोह फैला लिया था। अधिकतर जिलों में उसके गिरोह के सदस्य बन गए थे। वह यूपी का बड़ा डॉन बनना चाहता था। इसी मकसद के साथ वह बहुत तेजी से गिरोह को बढ़ा रहा था। वहां जिस क्षेत्र में जाता वहां पर सक्रिय गिरोह के साथ हाथ मिलाता था और नए युवाओं को गिरोह में जोड़ लेता था।
पश्चिमी यूपी का कुख्यात अनिल दुजाना चार मई को एसटीएफ की मुठभेड़ में मारा गया था। एसटीएफ और गौतमबुद्धनगर पुलिस को उसकी तलाश थी। कुख्यात अनिल दुजाना वेस्ट यूपी में खौफ का पर्याय बना हुआ था। उस पर लूट, हत्या, डकैती समेत 65 मुकदमे दर्ज थे। मेरठ में एसटीएफ के एसपी बृजेश सिंह के नेतृत्व में टीम ने उसे गंगनहर पर भोला की झाल पर चार मई को घेर लिया था। अनिल दुजाना ने एसटीएफ की टीम पर गोली चला दी, जवाबी फायरिंग में वह मारा गया। कुख्यात अनिल दुजाना वारदातों में प्रतिबंधित बोर के हथियारों का इस्तेमाल करता था। जब वो जेल से बाहर था तो उसके गैंग के पास एके 47 और .30 बोर, नाइन एमए जैसे प्रतिबंधित बोर वाले हथियार थे। वो दोनों हाथों से पिस्टल चलाता था। पिछले कुछ वर्षों में उसने सहारनपुर से नोएडा और इटावा से लेकर फैजाबाद तक अपना गिरोह फैला लिया था। अधिकतर जिलों में उसके गिरोह के सदस्य बन गए थे। वह यूपी का बड़ा डॉन बनना चाहता था। इसी मकसद के साथ वह बहुत तेजी से गिरोह को बढ़ा रहा था। वहां जिस क्षेत्र में जाता वहां पर सक्रिय गिरोह के साथ हाथ मिलाता था और नए युवाओं को गिरोह में जोड़ लेता था।
लखनऊ कोर्ट में संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या
लखनऊ के एससीएसटी कोर्ट रूम में 7 जून को मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कुख्यात अपराधी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा (50) की हत्या कर दी गई थी। वकील के लिबास में आए हमलावर ने कोर्ट रूम में ही रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस दौरान दो पुलिसकर्मियों, एक डेढ़ साल की बच्ची व उसकी मां को भी गोली लगी। जीवा पर हमलावर ने पीछे से फायरिंग की। वारदात के बाद वकीलों ने दौड़कर हमलावर को दबोच लिया और पीटकर पुलिस को सौंप दिया। मुजफ्फरनगर निवासी संजीव उर्फ जीवा ने वर्ष 1991 में मुजफ्फनगर में पहला अपराध किया था। तब उसके खिलाफ कोतवाली नगर में मारपीट का केस दर्ज किया गया था। उसके केस में वह दोषमुक्त भी हो चुका था। वर्ष 1991 में किए गए पहले अपराध के बाद संजीव ने अपराध की दुनिया में एक कदम रखा कि फिर वह अपराध के दलदल में डूबता चला गया। पुलिस रिकार्ड बताते हैं कि संजीव के खिलाफ मुजफ्फरनगर में 17, उत्तराखंड में 5, गाजीपुर जनपद में एक, फर्रूखाबाद जनपद में एक और लखनऊ में एक कूल 25 मामले दर्ज थे।
लखनऊ के एससीएसटी कोर्ट रूम में 7 जून को मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कुख्यात अपराधी संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा (50) की हत्या कर दी गई थी। वकील के लिबास में आए हमलावर ने कोर्ट रूम में ही रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस दौरान दो पुलिसकर्मियों, एक डेढ़ साल की बच्ची व उसकी मां को भी गोली लगी। जीवा पर हमलावर ने पीछे से फायरिंग की। वारदात के बाद वकीलों ने दौड़कर हमलावर को दबोच लिया और पीटकर पुलिस को सौंप दिया। मुजफ्फरनगर निवासी संजीव उर्फ जीवा ने वर्ष 1991 में मुजफ्फनगर में पहला अपराध किया था। तब उसके खिलाफ कोतवाली नगर में मारपीट का केस दर्ज किया गया था। उसके केस में वह दोषमुक्त भी हो चुका था। वर्ष 1991 में किए गए पहले अपराध के बाद संजीव ने अपराध की दुनिया में एक कदम रखा कि फिर वह अपराध के दलदल में डूबता चला गया। पुलिस रिकार्ड बताते हैं कि संजीव के खिलाफ मुजफ्फरनगर में 17, उत्तराखंड में 5, गाजीपुर जनपद में एक, फर्रूखाबाद जनपद में एक और लखनऊ में एक कूल 25 मामले दर्ज थे।
इटावा में दो सगी बहनों को बड़ी बहन ने मार डाला
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में इसी साल अक्तूबर माह में बलरई थाना इलाके के बहादुर गांव में दो मासूम बहनों की घर में घुसकर धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। दो सगी बहनों की हत्या के मामले में बड़ी बहन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। साथ ही, आरोपी बहन के पास से कत्ल में इस्तेमाल फावड़ा भी बरामद कर लिया गया था। इस नृशंस हत्याकांड में बड़ी बहन ने घटना को अंजाम देने की बात कबूल की थी। मामले में एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया था कि बहादुरपुर गांव निवासी जयवीर पाल की दो बेटियां शिल्पी (7) और रोशनी (5) की आठ अक्तूबर को फावड़े से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पिता की तहरीर पर दोनों बेटियों की हत्या करने में बड़ी बेटी अंजली के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। अंजली को पुलिस ने गिरफ्तार करके पूछताछ की थी। इसमें पुलिस को प्रेमी के कहने पर हत्या के लिए उकसाने की बात सामने आई थी।
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में इसी साल अक्तूबर माह में बलरई थाना इलाके के बहादुर गांव में दो मासूम बहनों की घर में घुसकर धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। दो सगी बहनों की हत्या के मामले में बड़ी बहन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। साथ ही, आरोपी बहन के पास से कत्ल में इस्तेमाल फावड़ा भी बरामद कर लिया गया था। इस नृशंस हत्याकांड में बड़ी बहन ने घटना को अंजाम देने की बात कबूल की थी। मामले में एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया था कि बहादुरपुर गांव निवासी जयवीर पाल की दो बेटियां शिल्पी (7) और रोशनी (5) की आठ अक्तूबर को फावड़े से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पिता की तहरीर पर दोनों बेटियों की हत्या करने में बड़ी बेटी अंजली के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। अंजली को पुलिस ने गिरफ्तार करके पूछताछ की थी। इसमें पुलिस को प्रेमी के कहने पर हत्या के लिए उकसाने की बात सामने आई थी।