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तुमने ही कहा था कल हमसे दिन अच्छे आने वाले हैं...

Sun, 14 Jun 2015 02:15 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
वाराण्ासी, ब्यूरो Updated Sun, 14 Jun 2015 02:15 AM IST
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You had stated yesterday is coming to us good day ...

वाराणसी। बेनियाबाग के मैदान में शनिवार की रात हुए मुशायरे में योग और सूर्य नमस्कार के सियासी मायने गजलों, बज्मों में छाए रहे। अच्छे दिनों के वादे और सूर्य नमस्कार पर चल रही सियासत पर गजलें खूब पढ़ी गईं। गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करने की कोशिश की गई तो सलीका भी पेश किया गया।

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सूरज की रोशनी का सवाल आया तो इस मुशायरे में बतौर मेहमाने खुसूसी हिस्सा लेने पहुंचे सूबे के नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां भी खुद को शेर पढ़ने से नहीं रोक सके और उन्होंने माइक थाम लिया। उन्होंने शेर पढ़ा- हमारे लिए सूरज अल्लाह की निशानी है/हमसे ज्यादा सूरज की कद्र कोई कर नहीं सकता...। बनारस स्पोर्टिंग क्लब की ओर से यह अखिल भारतीय मुशायरा और कवि सम्मेलन मौलाना मोहम्मद अली जौहर की याद में आयोजित किया गया था।
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खचाखच भीड़ के बीच मुशायरे की शुरुआत हुई कमाल अख्तर की गजलों से। उन्होंने अर्ज किया - कहां तक हक मेरा काटोगे आखिर तुम मेरा उजालों से, महक मेरी ही आएगी तुम्हें मेरे निवालों से...। इनके बाद नदीम शाद ने गजल पढ़ी। उनके शेर की पंक्तियां इस तरह थीं- अमीरे शहर का नशा उतरने वाला है/हमारे जिस्म का एक जख्म भरने वाला है/तू रो रहा है कि दस्तार छिन गई तेरी/तू मुझको देख मेरा सर उतरने वाला है...। जमीं नहीं तो फलकदार कर दिया जाए/ हमें कहीं का तो हकदार कर दिया जाए...।
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इनके बाद आबिद वफा ने गजल पेश की। शेर इस तरह थे- क्यों आज नजर है शर्मिंदा क्यों आज जुबां पर ताले हैं/तुमने ही कहा था कल हमसे दिन अच्छे आने वाले हैं...। इन्होंने अपने शेरों से खूब तालियां बटोरीं। इनसे पहले नगर विकास मंत्री ने कहा कि यह मुशायरा तहजीब के शहर में गंगा-जमुनी तहजीब के लिए आइना साबित होगा।

 उन्होंने कहा कि सूरज पर हक सबका है लेकिन अब कुछ लोग सूरज और चांद को भी बांट रहे हैं। इस दौरान आजम ने शहर के तीन शायरों को अंगवस्त्रम और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इनमें सलीम सोहरावर्दी, डॉ. मो. नाजिम जाफरी, प्रो. याकूब यायावर शामिल हैं। इनसे पहले अकील नोमानी, रेयाज बनारसी ने भी गजलें पढ़ीं। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष शकील अहमद बबलू ने शायरों और अतिथियों का स्वागत किया।

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