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पूर्वांचल में योगी सरकार की मदद से आगे बढ़ेगा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग
amarujala.com, written by प्रदीप मिश्र
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:13 PM IST
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सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र
- फोटो : अमर उजाला
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने पूर्वांचल की एमएसएमई को चिह्नित कर उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है। केंद्र सरकार चाहती है कि बनारस का विश्व प्रसिद्ध साड़ी उद्योग, भदोही का कालीन उद्योग और मिर्जापुर के पीतल उद्यमियों की समस्याएं कम हों।
इन तीनों ही उद्यमों के क्लस्टर हैं लेकिन इन्हें और कारगर बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। तीन साल पुरानी केंद्र सरकार को तीन महीने पहले तक इसे तेजी से पूरा करने में मुश्किल आती थी। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों सरकारें तालमेल के साथ इसे आगे बढ़ाने पर सहमत हुई हैं।
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र कहते हैं कि तीन साल में इस क्षेत्र के उद्यमियों की बेहतरी के लिए तमाम योजनाएं शुरू की गई हैं। माई एमएसएमई ऐप को डाउनलोड कर इन्हें देखा जा सकता है। अब तक इस ऐप को 32 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।
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यही नहीं, इस क्षेत्र से रोजगार के अवसरों का सृजन भी हुआ है। वह कहते हैं कि बावजूद इसके बड़े-बड़े उद्योग संगठन एसोचैम और फिक्की अपने सर्वेक्षणों में इस सेक्टर में काम करने वालों को शामिल नहीं करते हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में एमएसएमई की स्थिति महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुकाबले तो कमजोर है ही, उत्तराखंड भी इस मामले में यूपी से आगे है। उत्तर प्रदेश में इसके पिछड़ने के कारण सपा सरकार द्वारा कॉमन फेसिलिटी सेंटर के जमीन उपलब्ध कराने और इस सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक निश्चित सीमा तक खरीदारी का आश्वासन पूरा नहीं करना रहा है।
पूर्वांचल में बुनकरी के अलावा जरी-जरदोजी, हथकरघा और वुडन कार्विंग की अधिकतर इकाइयों में मशीनरी और प्लांट पांच करोड़ से कम लागत वाले हैं और एमएसएमई के दायरे में आते हैं। ये उद्यमी मऊ से लेकर चंदौली जिले में भी हैं।
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इन तीनों ही उद्यमों के क्लस्टर हैं लेकिन इन्हें और कारगर बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। तीन साल पुरानी केंद्र सरकार को तीन महीने पहले तक इसे तेजी से पूरा करने में मुश्किल आती थी। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों सरकारें तालमेल के साथ इसे आगे बढ़ाने पर सहमत हुई हैं।
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केंद्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र कहते हैं कि तीन साल में इस क्षेत्र के उद्यमियों की बेहतरी के लिए तमाम योजनाएं शुरू की गई हैं। माई एमएसएमई ऐप को डाउनलोड कर इन्हें देखा जा सकता है। अब तक इस ऐप को 32 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं।
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यही नहीं, इस क्षेत्र से रोजगार के अवसरों का सृजन भी हुआ है। वह कहते हैं कि बावजूद इसके बड़े-बड़े उद्योग संगठन एसोचैम और फिक्की अपने सर्वेक्षणों में इस सेक्टर में काम करने वालों को शामिल नहीं करते हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश में एमएसएमई की स्थिति महाराष्ट्र और कर्नाटक के मुकाबले तो कमजोर है ही, उत्तराखंड भी इस मामले में यूपी से आगे है। उत्तर प्रदेश में इसके पिछड़ने के कारण सपा सरकार द्वारा कॉमन फेसिलिटी सेंटर के जमीन उपलब्ध कराने और इस सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक निश्चित सीमा तक खरीदारी का आश्वासन पूरा नहीं करना रहा है।
पूर्वांचल में बुनकरी के अलावा जरी-जरदोजी, हथकरघा और वुडन कार्विंग की अधिकतर इकाइयों में मशीनरी और प्लांट पांच करोड़ से कम लागत वाले हैं और एमएसएमई के दायरे में आते हैं। ये उद्यमी मऊ से लेकर चंदौली जिले में भी हैं।
सैमसंग ने भी 10 ट्रेनिंग सेंटर खोले
कलराज मिश्र
कलराज मिश्र कहते हैं- अब पूर्वांचल को उनके मंत्रालय की योजनाओं का फायदा मिलने की शुरूआत होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल के छोटे-छोटे उद्योगों की बदहाली को लेकर चिंतित हैं।
उनसे बात हुई है और वह इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए केंद्र सरकार के साथ हर तरह का सहयोग करने को तैयार हैं। मिश्र ने बताया कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए शुरू की गई स्पायर योजना का परिणाम बहुत सकारात्मक रहे हैं।
अब तक योजना 56 जगह शुरू हो चुकी है। योजना के तहत सैमसंग ने भी 10 ट्रेनिंग सेंटर खोले हैं। वाराणसी में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य भी हुआ है।
यही नहीं, मिश्र का दावा है कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने खादी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रयत्न शुरू कर दिए हैं।
विश्व बाजार में इसके उत्पादों को प्रोत्साहन के लिए इसकी विपणन व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त कर लिया गया है। खादी से जुड़े संस्थानों की आत्मनिर्भरता के लिए मेरठ और लखनऊ में इनके उत्पादों को अपग्रेड भी किया जा रहा है।
उनसे बात हुई है और वह इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए केंद्र सरकार के साथ हर तरह का सहयोग करने को तैयार हैं। मिश्र ने बताया कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए शुरू की गई स्पायर योजना का परिणाम बहुत सकारात्मक रहे हैं।
अब तक योजना 56 जगह शुरू हो चुकी है। योजना के तहत सैमसंग ने भी 10 ट्रेनिंग सेंटर खोले हैं। वाराणसी में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य भी हुआ है।
यही नहीं, मिश्र का दावा है कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने खादी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए प्रयत्न शुरू कर दिए हैं।
विश्व बाजार में इसके उत्पादों को प्रोत्साहन के लिए इसकी विपणन व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त कर लिया गया है। खादी से जुड़े संस्थानों की आत्मनिर्भरता के लिए मेरठ और लखनऊ में इनके उत्पादों को अपग्रेड भी किया जा रहा है।