Year Ender 2020: कोरोना के कारण आजाद भारत में पहली बार स्टेशनों पर पसरा सन्नाटा, 38 दिन बाद ट्रेनों ने पकड़ी रफ्तार
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देश की आजादी के बाद कभी भी रेलवे का पहिया लगातार 38 दिनों तक जाम नहीं था। मगर, कोरोना ने ऐसा कहर ढाया कि रेलवे की यात्री सेवाएं ठप हो गईं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और 24 मार्च को देशभर में लॉकडाउन की घोषणा हुई तो जहां तहां ट्रेनें थम गईं। यार्ड और वाशिंग लाइन में शंट हो गईं थीं। माहौल सामान्य हुआ तो दो मई को पहली ट्रेन आर्मी स्पेशल कैंट रेलवे स्टेशन से होकर गुवाहाटी गई थी। अहमद नगर से गुवाहाटी को जाने वाली 22 कोच की इस ट्रेन में 1000 जवान सवार थे। न ही कोई कैंट पर उतरा और न ही सवार हुआ था।
कोरोना से पहले जहां 146 ट्रेनें रोजाना कैंट स्टेशन से देश के विभिन्न प्रांतों को गुजरती थीं, लगभग डेढ़ लाख यात्रियों की आवाजाही होती थी। वह सब ठप था। चार मई को जालंधर से बलिया के बीच श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई जो कैंट स्टेशन से होकर गुजरी थी। इसके बाद तो मई तक सिर्फ श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का ही आवागमन होता रहा, लेकिन एक जून से यात्री सेवाएं भी बहाल हुईं तो बनारस से कामायनी एक्सप्रेस, महानगरी, शिवगंगा, महामना, आनंद विहार, गाजीपुर के लिए सुहेलदेव एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुआ था। देश के विभिन्न राज्यों के फंसे हुए यात्रियों को कैंट रेलवे स्टेशन के यात्री हाल में ठहराया गया था।
125 ट्रेनों के डेढ़ लाख श्रमिकों का भरा था पेट
कैंट स्टेशन पर 126 ट्रेनों से काशी आए डेढ़ लाख श्रमिकों को भोजन व पानी दिया गया। वहीं स्टेशन से बिहार, झारखंड, बंगाल के लिए जाने वाले दस लाख यात्रियों को जिला प्रशासन व समाजसेवी संगठनों ने भोजन व पानी उपलब्ध कराया।
9 माह बाद भी नहीं शुरू हो सका जनरल टिकट
कोरोना का असर ऐसा था कि यात्री ट्रेनों में सफर करने के लिए यात्रियों को आरक्षण टिकट ही लेना पड़ा। एक जून से ट्रेनें खुलीं तो अब तक आरक्षित टिकट से ही सफर को अनुमति है। लेकिन जनरल टिकट अब तक नहीं शुरू हो सका।
रेलवे कोच बन गए आईसोलेशन कोच
पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेन के खाली रैक को ही आईसोलेशन कोच में तब्दील कर दिया था। रेलवे के इतिहास में पहली बार हुआ था कि कोच को मेडिकल उपकरणों से लैस किया गया। 11 स्टेशनों पर आइसोलेशन कोच बनाए गए थे।
सैनिटाइजर और मास्क का उत्पादन भी हुआ
गाजीपुर के औड़िहार डेमू शेड में रोजाना सैनिटाइजर का उत्पादन किया जा रहा था। कारखानों में रेल अभियंताओं ने पैडल सैनिटाइजर मशीन, टचलेस वाश बेसिन और संक्रमण रोधी टनल तक बना दिया था।
90 मिनट पहले पहुंचे स्टेशन, बिना टिकट यात्रा नहीं
कोरोना काल में 90 मिनट पहले स्टेशन पहुंच अनिवार्य कर दिया गया। ऐसा थर्मल स्क्रीनिंग व इमेज स्कैनर से जांच प्रकिया से होकर ही प्लेटफार्म पर जाने के लिए करना पड़ा। बगैर कंफर्म टिकट के ट्रेनों में सफर करने की अनुमति नहीं है।
कोच को दिया नया रंग रूप
लाकडाउन लगा पर रेलवे के मालगाड़ी और पार्सल गाड़ियों की रफ्तार नहीं थमी। बल्कि ज्यादा की संख्या में पार्सल ट्रेनें चलाई गईं। वहीं रेलवे मैकेनिकल शाखा के अधिकारियों व कर्मचारियों ने रेलवे कोच को भी नया रंग रूप दिया।
मिली तीसरी कारपोरेट ट्रेन काशी-महाकाल
आईआरसीटीसी की तीसरी कारपोरेट ट्रेन काशी-महाकाल एक्सप्रेस को पीएम नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को हरी झंडी दिखाकर कैंट स्टेशन से महाकाल उज्जैन के लिए रवाना किया था। अधिकारिक यात्रा 20 फरवरी को शुरू हुई थी।
रेलवे की उपलब्धियां
- पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से औड़िहार-भटनी दोहरीकरण का विद्युतीकरण किया गया।
- मंडुवाडीह से माधो सिंह दोहरीकरण विद्युतीकरण लगभग 42 किमी का किया गया।
- बनारस से गोरखपुर के बीच विद्युत इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ।
- कैंट रेलवे स्टेशन पर नई बिल्डिंग में जीआरपी थाना खुला।
- वर्तमान में प्रमुख 50 स्पेशल ट्रेनों का कैंट स्टेशन से हो रहा आवागमन
- लगभग 50 हजार यात्रियों की रोजाना है आवाजाही