विश्व दृष्टि दिवस: युवाओं में बढ़ रहा कंप्यूटर विजन सिंड्रोम का खतरा, आंखों में सूखापन या आंसू की कमी तो हो जाएं सावधान
नेत्र रोग से बचाव के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से ही हर साल 14 अक्तूबर को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम लव योर आईज यानि अपनी आंखों से प्यार करें रखी गई है।
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आंखों में सूखापन या आंसू की कमी की समस्या इन दिनों अधिक बढ़ गई है। बीएचयू अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में इस तरह की समस्या के लिए आने वाले मरीजों में युवाओं की संख्या अधिक है। चिकित्सकों के अनुसार इस तरह की बीमारी को कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है।
समय रहते इस पर ध्यान न देने की वजह से इससे आंखों की रोशनी भी कमजोर होने की संभावना अधिक रहती है। नेत्र रोग से बचाव के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से ही हर साल 14 अक्तूबर को विश्व दृष्टि दिवस मनाया जाता है। इस साल की थीम लव योर आईज यानि अपनी आंखों से प्यार करें रखी गई है।
बच्चों में बढ़ रही आंखों में सूखापन की बीमारी
जिस तरह से नेत्र संबंधी बीमारी बढ़ रही है, उसको लेकर जागरूकता बहुत जरूरी है। क्षेत्रीय नेत्र संस्थान (बीएचयू) के निदेशक प्रो.एमके सिंह ने कहा कि बड़ों की तुलना में जिस तरह से बच्चों में आंखों में सूखापन की बीमारी बढ़ रही हैं, उसको लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ओपीडी में आने वाले बच्चों के अभिभावकों को भी जागरूक किया जा रहा है। बच्चे हो या बड़े कोरोना काल में इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग अधिक करना पड़ा है।
आंखों को आराम देने की सलाह
बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल में घर पर रहने के दौरान बच्चों ने पढ़ाई के लिए सबसे अधिक मोबाइल, लैपटॉप का प्रयोग किया। इससे उनकी आंखों में सूखापन या आंसू की कमी हो गई। ओपीडी में इस तरह की समस्या लिए 20 साल से कम उम्र के युवा आ रहे हैं। इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम होने कहा जाता है। उन्हें बहुत देर तक स्क्रीन पर काम न करने और बीच-बीच में आंखों को आराम देने की सलाह दी जा रही है।
चार हजार लोगों का नेत्रदान करा चुके हैं डॉ. टंडन
नेत्र रोग विशेषज्ञ और लांयस आई बैंक के सचिव डॉ. अनुराग टंडन इन दिनों नेत्रदान के प्रति जागरूकता को लेकर बड़ी मुहिम चला रहे हैं। लोगों में केवल जागरूकता ही नहीं बल्कि समय-समय पर नि:शुल्क जांच शिविर में जांच और नि:शुल्क ऑपरेशन कर आंखों को रोशनी देने में लगे हैं। डॉ. टंडन ने बताया कि अब तक चार हजार लोगों का नेत्रदान करा चुके हैं।
बताया कि इन दिनों ग्लूकोमा की समस्या बढ़ रही है। इस पर समय से ध्यान न देने पर यह बीमारी बढ़ जाती है और सिरदर्द आदि की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए।
अब तक सबसे कम उम्र 28 घंटे के नवजात शिशु और सबसे अधिक आयु 105 साल की महिला का नेत्रदान कराकर उन्होंने रिकार्ड भी बनाया है। अब तक 11 लाख लोगों की नि:शुल्क जांच करीब सवा लाख लोगों को नि:शुल्क मोतियाबिंद का आपरेशन कर ज्योति प्रदान की है। बताया कि शारदीय नवरात्र से चैत्र नवरात्र तक नि:शुल्क ऑपरेशन, नि:शुल्क परामर्श, नि:शुल्क चश्मा दिया जाएगा।