रेटिनोब्लास्टोमा: बच्चों में बढ़ रहा आंख के कैंसर का खतरा, 8 से 14 मई तक जागरूकता सप्ताह का आयोजन
बच्चों में आंख के कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। बीएचयू में काफी मरीज बाल रोग विभाग में इलाज के लिए आ रहे हैं। 8 से 14 मई तक विश्व रेटिनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत लोगों को बीमारियों के कारण, बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है।
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रेटिनोब्लास्टोमा यानी बाल्यकाल में होने वाला नेत्र कैंसर। बच्चों में यह बीमारी बढ़ती जा रही है। आम तौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में आंख का यह कैंसर होता है। बीएचयू में पिछले आठ साल में अब तक 294 ऐसे मरीज बाल रोग विभाग में इलाज के लिए आ चुके हैं। इसमें 2022 में ही अब तक 10 बच्चे पंजीकृत हो चुके हैं।
बच्चों में होने वाले आंख के कैंसर के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल की तरह इस साल भी 8 से 14 मई तक विश्व रेटिनोब्लास्टोमा जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके तहत लोगों को बीमारियों के कारण, बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है।
बीएचयू के नेत्र कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आरपी मौर्य का कहना है कि रेटिनोब्लास्टोमा बच्चों की आंख की दृष्टिपटल (रेटिना) की प्रकाश संवेदी कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। हर बीस हजार जन्म लेने वाले शिशुओं में एक को यह बीमारी होती है। सही समय पर उचित इलाज न होने पर यह जानलेवा हो जाता है।
आठ साल में आए 294 बच्चे
डॉ. आरपी मौर्य के अनुसार बीएचयू अस्पताल के नेत्र रोग और बाल रोग विभाग में पिछले आठ सालों में 294 ऐसे बच्चे आ चुके हैं, जिनमें यह बीमारी मिली। इसमें वर्ष 2014 में 36, 2015 में 44, 2016 में 54, 2017 में 56 और 2018 में 46 बच्चे आए। इसके अलावा वर्ष 2019 में 20 बच्चे, 2020 में 8, 2021 में 22 और 2022 में अबतक 10 बच्चे पंजीकृत हो चुके हैं। इसमें से 61.2 प्रतिशत लड़के और शेष लड़कियां थीं। 69.7 प्रतिशत बच्चे दो वर्ष से कम उम्र के थे।
प्रमुख लक्षण
इसके प्रमुख लक्षणों में आंख की काली पुतली के पीछे बिल्ली की आंख की तरह सफेद या पीली चमक दिखना है। करीब 20 प्रतिशत बच्चों में आंखों का तिरछापन या भेंगापन हो जाता है। इसके शरीर के अन्य भाग में कैंसर के फैलाव को जानने के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड व रीढ़ से पानी निकालकर जांच की जाती है।
ऐसे होता है इलाज
छोटे आकार के कैंसर के लिए लेजर थर्मोथेरेपी या क्रायोथेरेपी (ट्यूमर को बर्फ से फ्रीज करना) करते हैं। बड़े ट्यूमर के लिए रेडिएशनथेरेपी करते हैं। इसमें रेडियोएक्टिव किरणों द्वारा ट्यूमर की सेकाई की जाती है। रेटिनोब्लास्टोमा को जड़ से समाप्त करने के लिए कैंसररोधी दवाएं (कीमोथेरेपी) भी दी जाती हैं।