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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   World Asthma Day 2025 asthma patients even 5000 years ago know symptoms and reason

World Asthma Day: 5000 साल पहले भी थे अस्थमा के मरीज, जंगलों में छुपा था इलाज; लक्षण और वजह जान लें

Tue, 06 May 2025 05:06 PM IST
प्रगति चंद हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 06 May 2025 05:06 PM IST
सार

World Asthma Day 2025 : 5000 साल पहले भी अस्थमा के मरीज थे। डॉक्टर के मुताबिक भारत में आज भी पांच हजार साल पुरानी इलाज पद्धति कारगर है। पहले जंगल में ही अस्थमा का उपचार छिपा होता था। 

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World Asthma Day 2025 asthma patients even 5000 years ago know symptoms and reason
अस्थमा दिवस - फोटो : Freepik

विस्तार

अस्थमा के मरीज आज से 5000 साल पहले भी थे। प्राचीन काल में इस बीमारी को तमक श्वास कहा जाता था। मूल चरक संहिता में में कहा गया था कि ये बीमारी वात और कफ दोष के असंतुलन से होती है। जिसे बिना किसी दुष्प्रभाव के प्राकृतिक तरीके से ठीक किया जा सकता है। इसका इलाज जंगलों में ही छुपा था। हर साल मई के पहले मंगलवार को मनाए जाने वाले आज विश्व अस्थमा दिवस पर आयुर्वेद की भूमिका पर लोगों का भरोसा है। 

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राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के कायचिकित्सा-पंचकर्म विभाग के वैद्य डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि भारत में आज भी 5 हजार साल पुरानी इलाज पद्धति काफी कारगर है। तब पूरे भारत में घने जंगल हुआ करते थे। हर जगह पर बड़ी मात्रा में आयुर्वेदिक औषधियों की भरमार थी। इसमें चूर्ण (पाउडर), चाशनी (सीरप), क्वाथ (काढ़ा) और रसों (गोलियों) है। साथ ही पंचकर्म में वमन और नस्य प्रक्रिया भी फायदा पहुंचाती है। 
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उन्होंने कहा कि हमारे ऋषिमुनियों ने इन्हें खोजा और सूत्रों को एक जगह संकलित किया, फिर आने वाली पीढि़यों ने उन सूत्रों के अनुसार दवाओं के निर्माण को जारी रखा। इनमें से आज भी कई दवाएं इस्तेमाल हो रहीं हैं। वहीं ये रोग न हो इसके लिए उसी काल से प्राणायाम और योग, भस्त्रिका, अनुलोम-विलोम और कपालभाति का अभ्यास किया जाता था।

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नलियों के सिकुड़ने से होता है अस्थमा

डॉ. गुप्ता ने कहा कि इस दिन का उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता फैलाना और इसको रोकने के उपायों को बढ़ावा देना है। अस्थमा, श्वास की एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसमें श्वास नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं और श्वास लेने में दिक्कत होती है। खांसी, और छाती में जकड़न जैसी समस्याएं होती हैं। 

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अस्थमा के लक्षण 
थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने लगती है। अक्सर रात और सुबह में सांस लेने में दिक्कत। बार-बार खांसी और सांस लेते समय सीटी या घरघराहट की आवाज आती है। कफ का न निकल पाना या गले का सूखना। धूल, ठंडी हवा या हल्की शारीरिक गतिविधि से सांस लेने में तकलीफ होती है। 
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