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श्रावणी उपाकर्म पर शुद्धि के साथ सूर्य से मांगा तेज
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प्रायश्चित, स्वाध्याय और संस्कार के लिए श्रावणी उपाकर्म हुआ। हिमाद्री संकल्प के साथ विप्र समाज ने वैदिक कालीन परंपरा का निर्वहन किया। रविवार को परंपरा के अनुसार गंगा घाटों पर उपाकर्म का आयोजन किया गया। पूजन में उपस्थित सभी विप्रों ने मंत्रोच्चार के साथ पंचगव्य से स्नान कर भस्म लेपन किया।
अस्सी से राजघाट के बीच गंगा के तट पर ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म की परंपरा का निर्वहन किया। कुशा, दुर्वा व अपामार्ग से मार्जन कर ब्राह्मणों ने अंत: और वाह्यकरण की शुद्धि के साथ सूर्य का ध्यान कर तेज की कामना की। इसके पश्चात नूतन यज्ञोपवीत का ऋषि पूजन कर उसे धारण किया गया। श्रावणी द्वारा वर्ष पर्यंत ज्ञात-अज्ञात पापकर्मों के प्रायश्चित के साथ जगत कल्याण की कामना भी की।
श्री राजस्थान ब्राह्मण मंडल का श्रावणी उपाकर्म मानमंदिर घाट पर एवं ऋषि पूजन यज्ञोपवीत पूजन मीरघाट पर स्थित मंडल भवन में किया गया। पं. कैलाश मिश्र के आचार्य में विप्र समाज के लोगों ने विधि-विधान पूर्ण किए। इस दौरान विजय मिश्र, अनिल मिश्र, प्रकाश मिश्र, जयप्रकाश आचार्य, मनोज शर्मा, राजकुमार गुरु, गोपाल शर्मा, हरीश पुरोहित, राकेश मिश्र, संजय ढांचोलिया आदि मौजूद रहे।
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गंगा तट पर गण पूजन, विश्वविद्यालय में हुआ ऋषि पूजन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय केवेद विभाग की ओर से श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर राष्ट्र कल्याण के उद्देश्य से श्रावणी उपाकर्म का आयोजन हुआ। गंगा के तट पर जहां गण पूजन हुआ वहीं विश्वविद्यालय परिसर में ऋषि पूजन संपन्न हुआ। रविवार को वेदविभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र नाथ पांडेय ने प्रात: 7:30 बजे गंगा तट पर गण पूजन पूर्ण किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के वेद विभाग में 10 बजे कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में ऋषि पूजन किया गया। कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन ऋ षियों के स्मरण तथा पूजा और समर्पण का पर्व माना जाता है। यह पर्व द्विजन्म के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. सदानंद शुक्ला, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विजय शर्मा, संतोष दुबे मौजूद रहे।
श्रावणी उपाकर्म से नष्ट होते हैं शारीरिक और मानसिक पाप
अस्सी स्थित रामेश्वर मठ की ओर से श्रावणी उपाकर्म व ऋषि पूजन का आयोजन हुआ। काशी धर्मपीठ रामेश्वर मठ के स्वामी लखन स्वरूप ब्रह्मचारी व काशी विद्वत परिषद के महामंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी के सानिध्य में तुलसी घाट पर श्रावणी उपाकर्म हुआ। पट्टाभिराम शास्त्री वेद मीमांसा अनुसंधान केंद्र के वेदाचार्य डॉ. सर्वेश रमण तिवारी के आचार्यत्व में श्रावणी उपाकर्म के विधि-विधान संपन्न हुआ। डॉ. राम नारायण द्विवेदी ने कहा कि ब्राह्मणों को श्रावणी उपाकर्म अवश्य करना चाहिए। इस दौरान डॉ. हनुमान मिश्र, डॉ. गंगाधर मिश्र, डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, डॉ. संजय त्रिपाठी, आचार्य वरुणेश चंद्र दीक्षित, डॉ.अखिलेश कुमार, रामयश मिश्र मौजूद रहे।
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अस्सी से राजघाट के बीच गंगा के तट पर ब्राह्मणों ने श्रावणी उपाकर्म की परंपरा का निर्वहन किया। कुशा, दुर्वा व अपामार्ग से मार्जन कर ब्राह्मणों ने अंत: और वाह्यकरण की शुद्धि के साथ सूर्य का ध्यान कर तेज की कामना की। इसके पश्चात नूतन यज्ञोपवीत का ऋषि पूजन कर उसे धारण किया गया। श्रावणी द्वारा वर्ष पर्यंत ज्ञात-अज्ञात पापकर्मों के प्रायश्चित के साथ जगत कल्याण की कामना भी की।
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श्री राजस्थान ब्राह्मण मंडल का श्रावणी उपाकर्म मानमंदिर घाट पर एवं ऋषि पूजन यज्ञोपवीत पूजन मीरघाट पर स्थित मंडल भवन में किया गया। पं. कैलाश मिश्र के आचार्य में विप्र समाज के लोगों ने विधि-विधान पूर्ण किए। इस दौरान विजय मिश्र, अनिल मिश्र, प्रकाश मिश्र, जयप्रकाश आचार्य, मनोज शर्मा, राजकुमार गुरु, गोपाल शर्मा, हरीश पुरोहित, राकेश मिश्र, संजय ढांचोलिया आदि मौजूद रहे।
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गंगा तट पर गण पूजन, विश्वविद्यालय में हुआ ऋषि पूजन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय केवेद विभाग की ओर से श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर राष्ट्र कल्याण के उद्देश्य से श्रावणी उपाकर्म का आयोजन हुआ। गंगा के तट पर जहां गण पूजन हुआ वहीं विश्वविद्यालय परिसर में ऋषि पूजन संपन्न हुआ। रविवार को वेदविभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र नाथ पांडेय ने प्रात: 7:30 बजे गंगा तट पर गण पूजन पूर्ण किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के वेद विभाग में 10 बजे कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में ऋषि पूजन किया गया। कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन ऋ षियों के स्मरण तथा पूजा और समर्पण का पर्व माना जाता है। यह पर्व द्विजन्म के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. सदानंद शुक्ला, डॉ. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विजय शर्मा, संतोष दुबे मौजूद रहे।
श्रावणी उपाकर्म से नष्ट होते हैं शारीरिक और मानसिक पाप
अस्सी स्थित रामेश्वर मठ की ओर से श्रावणी उपाकर्म व ऋषि पूजन का आयोजन हुआ। काशी धर्मपीठ रामेश्वर मठ के स्वामी लखन स्वरूप ब्रह्मचारी व काशी विद्वत परिषद के महामंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी के सानिध्य में तुलसी घाट पर श्रावणी उपाकर्म हुआ। पट्टाभिराम शास्त्री वेद मीमांसा अनुसंधान केंद्र के वेदाचार्य डॉ. सर्वेश रमण तिवारी के आचार्यत्व में श्रावणी उपाकर्म के विधि-विधान संपन्न हुआ। डॉ. राम नारायण द्विवेदी ने कहा कि ब्राह्मणों को श्रावणी उपाकर्म अवश्य करना चाहिए। इस दौरान डॉ. हनुमान मिश्र, डॉ. गंगाधर मिश्र, डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, डॉ. संजय त्रिपाठी, आचार्य वरुणेश चंद्र दीक्षित, डॉ.अखिलेश कुमार, रामयश मिश्र मौजूद रहे।