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Varanasi News: केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने एवं संस्कृत जगत के अभ्युदय की हुई कामना
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स्थापना दिवस पर संस्कृत विवि को केंद्रीय विवि बनाने की कामना
गूंजी शहनाई, हुआ हवन, गूंजे दुर्गा सप्तशती के मंत्र, संस्थापकों को किया गया नमन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 66वां स्थापना दिवस समारोह बृहस्पतिवार को शक्ति की आराधना के साथ आरंभ हुआ। संस्थापकों और गुरुओं को नमन करने के साथ ही मां दुर्गा से विश्वविद्यालय को केंद्रीय विवि बनाने एवं संस्कृत जगत के अभ्युदय की कामना की गई। साथ ही पूरा परिसर हवन के धुएं, शहनाई और वाद्य यंत्रों की सुमधुर ध्वनि से झंकृत होता रहा।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति उत्सवधर्मी संस्कृति है। जीवंत संस्कृति का यह चक्र अनवरत घूमता रहता है, ताकि हम सत्य से विमुख न हों। कुलपति ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद, पं. कमलापति त्रिपाठी एवं आचार्यों को श्रद्धांजलि दी। वेद भवन में शक्ति समाराधना कार्यक्रम में कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में देवी शक्ति, गौरी-गणेश का विधिपूर्वक पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ व हवन वेद विभाग के आचार्यों एवं विद्यार्थियों ने किया। कुलपति ने विश्वविद्यालय की विभूतियों का माल्यार्पण किया। इस अवसर पर प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विजय शर्मा और डॉ. सत्येंद्र यादव आदि उपस्थित थे।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संकल्पबद्ध होकर करें काम : कुलाधिपति
वाराणसी। स्थापना दिवस पर राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शुभकामना संदेश भेजा। कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपार उपलब्धियों के साथ स्थापना के 65 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कहा है कि नए वर्ष में नए संकल्प होने चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संकल्पबद्ध होकर तेजी से कार्य होना चाहिए। शिक्षण संस्थान समाज से जुड़ाव बढ़ाएं और सामाजिक समस्याओं के निदान में अहम भूमिका निभाएं । विश्वविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
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गूंजी शहनाई, हुआ हवन, गूंजे दुर्गा सप्तशती के मंत्र, संस्थापकों को किया गया नमन
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का 66वां स्थापना दिवस समारोह बृहस्पतिवार को शक्ति की आराधना के साथ आरंभ हुआ। संस्थापकों और गुरुओं को नमन करने के साथ ही मां दुर्गा से विश्वविद्यालय को केंद्रीय विवि बनाने एवं संस्कृत जगत के अभ्युदय की कामना की गई। साथ ही पूरा परिसर हवन के धुएं, शहनाई और वाद्य यंत्रों की सुमधुर ध्वनि से झंकृत होता रहा।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति उत्सवधर्मी संस्कृति है। जीवंत संस्कृति का यह चक्र अनवरत घूमता रहता है, ताकि हम सत्य से विमुख न हों। कुलपति ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद, पं. कमलापति त्रिपाठी एवं आचार्यों को श्रद्धांजलि दी। वेद भवन में शक्ति समाराधना कार्यक्रम में कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में देवी शक्ति, गौरी-गणेश का विधिपूर्वक पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ व हवन वेद विभाग के आचार्यों एवं विद्यार्थियों ने किया। कुलपति ने विश्वविद्यालय की विभूतियों का माल्यार्पण किया। इस अवसर पर प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विजय शर्मा और डॉ. सत्येंद्र यादव आदि उपस्थित थे।
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संकल्पबद्ध होकर करें काम : कुलाधिपति
वाराणसी। स्थापना दिवस पर राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शुभकामना संदेश भेजा। कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपार उपलब्धियों के साथ स्थापना के 65 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कहा है कि नए वर्ष में नए संकल्प होने चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए संकल्पबद्ध होकर तेजी से कार्य होना चाहिए। शिक्षण संस्थान समाज से जुड़ाव बढ़ाएं और सामाजिक समस्याओं के निदान में अहम भूमिका निभाएं । विश्वविद्यालय परिवार और विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
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