जिनके शव को पहचानने नहीं आता कोई, उनकी विसरा जांच के लिए पुलिस नहीं लेती सुध
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संदिग्ध हाल में जिनकी मौत होती है और शव की शिनाख्त नहीं हो पाती है, पोस्टमार्टम के बाद मौत की वजह स्पष्ट न होने पर उनके विसरा की जांच में भी देरी होती है। कारण कि न उनके संबंध में कोई पूछने के लिए आता है और न पुलिस ही उनके विसरा की जांच जल्द कराने की परवाह करती है।
इस वजह से उनका विसरा बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के फोरेंसिक विज्ञान विभाग के कमरे में जार में ही कैद रह जाता है।
रेलवे स्टेशनों के आसपास आए दिन संदिग्ध हाल में मृत पड़े लोगों के शव मिलते हैं। पुलिस पहले 72 घंटे में शव की शिनाख्त का प्रयास करती है। शिनाख्त न होने पर पोस्टमार्टम करा कर शव की अंत्येष्टि करा देती है। इनमें से कई ऐसे होते हैं जिनकी मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं हो पाती और उनका विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखना पड़ता है।
बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने इस संबंध में कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को खुद ही गंभीरता के साथ पहल करनी चाहिए। अदालत के निर्देश पर ही सारा काम हो यह सही नहीं है। पुलिस की गंभीरता मृतक के प्रति सम्मान होगी।
अधिवक्ता अंशुमान त्रिपाठी और वरुण प्रताप सिंह प्रिंस ने कहा कि विसरा के मामले में ज्यादातर यह देखने में आता है कि अदालत का आदेश होता है तभी पुलिस गंभीर होती है और रिपोर्ट जल्दी आती है। अब जिसकी शिनाख्त ही नहीं हुई, उसकी मौत की वजह जानने की जहमत कौन उठाएगा। पुलिस को यह रवैया छोड़ना चाहिए और संदिग्ध हाल में हुई सभी मौतों की वजह जानने के लिए गंभीरता से प्रयास करना चाहिए।