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WHO की रिपोर्टः दिनोंदिन जहरीली होती जा रही पवित्र नगरी काशी की हवा, किसी को कोई फिक्र नहीं

Wed, 02 May 2018 02:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 02 May 2018 02:09 PM IST
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WHO report says that varanasi air pollution is going toxic day by day
वाराणसी की सड़कों पर इस तरह का दृश्य आम है - फोटो : अमर उजाला
पवित्र नगरी काशी की हवा दिनोंदिन जहरीली होती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के 15 प्रदूषित शहरों में बनारस तीसरे स्थान पर है।
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डब्ल्यूएचओ की ओर से सालाना सर्वे के आधार पर बुधवार को जारी इस लिस्ट में पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर को शामिल किया गया है। 2010 से लेकर 2016 तक की रिपोर्ट में टॉप 15 में 14 भारतीय शहर ही हैं।

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दिल्ली से लेकर वाराणसी तक लोग प्रदूषण की गंभीर समस्या से घिरे हुए हैं लेकिन इसकी रोकथाम के कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। बनारस  की सड़कों पर प्रतिदिन दस लाख से अधिक वाहनों के चलते शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इसके अलावा शहर में विकास कार्यों के चलते भी प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इस वजह से शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है।
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पढ़ेंः बनारस की हवा सांस लेने लायक नहीं, खतरनाक स्तर से ऊपर पहुंचा वायु प्रदूषण

यहां बढ़ते प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तमाम अन्य कारक तो हैं ही, वाहनों का भी कम हाथ नहीं। हालात दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं और सड़कों पर वाहनों की भीड़ बढ़ती जा रही है।

बावजूद इसके वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की किसी को फिक्र तक नहीं। न हम संजीदा हैं न वे जिन पर वाहनों से निकलते विषैले धुएं पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी है। आखिर कैसे बदलेगी ये सूरत.. कैसे शहर की जहरीली होती आबो-हवा को बचाया जाए...।  

अगर हम अपनी भावी पीढ़ी को स्वस्थ-खुशहाल देखना चाहते हैं तो शहर के जिम्मेदार प्रबुद्धों को इस दिशा में गंभीरता से सोचना ही होगा।

काशी को निगलता धुआं और सो रहे हुक्मरां

WHO report says that varanasi air pollution is going toxic day by day
संभागीय परिवहन कार्यालय में करीब 10 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें तीन लाख से अधिक वाहन ऐसे हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं है। पंजीकृत वाहनों में 65 हजार 810 व्यावसायिक हैं।

 नियमत: इन सभी वाहनों को हर छह महीने बाद प्रदूषण नियंत्रण जांच केंद्र से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेना चाहिए। पर न कोई जांच कराता है और न जिम्मेदारों को जांच करने की फिक्र है। वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की जांच के लिए जिले में कुल नौ जांच केंद्र खोले गए हैं।

इन केंद्रों से मिले इनपुट के मुताबिक जिले की सड़कों पर दौड़ रहे 50 फीसदी से ज्यादा वाहन प्रदूषण की जांच कराए बगैर ही शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से करीब एक लाख वाहन तो ऐसे हैं जिन्होंने एक बार के बाद दोबारा प्रदूषण की जांच कराई ही नहीं।

शहर की आबो-हवा में जहर घोलने वाले इन वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग और यातायात पुलिस कार्रवाई करने तक की जहमत नहीं उठाते। वाहनों की चेकिंग तो की जाती है लेकिन प्रदूषण की जांच नहीं की जाती।
 

बनारस में दौड़ेंगी सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें

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electric bus


बनारस शहर की सड़कों पर अगले कुछ महीने में सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें नजर आ सकती हैं। यहां डीजल चालित सिटी बसों को हटाकर उनकी जगह सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने पर सैद्धांतिक  रूप से निर्णय लिया जा चुका है।

वाराणसी से शुरुआत के बाद प्रदेश के दूसरे महानगरों में भी सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की योजना रोडवेज प्रबंधन ने बनाई है। जानकारों के मुताबिक सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों से शहर में वायु और ध्वनि प्रदूषण में कमी आएगी।

इन बसों का मेंटेनेंस खर्च भी कम आएगा। शहर में सीएनजी का सब स्टेशन भी बनकर तैयार है। इसके जरिए बसों को सीएनजी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।  

मौजूदा समय वाराणसी रोडवेज के पास 100 से ज्यादा  सिटी बसें हैं। इनमें अधिकतर खस्ताहाल हैं। बीएचयू और डीरेका में के चार हजार से ज्यादा घरों में पीएनजी पहुंच चुकी है। यहां इनका ट्रायल हो रहा है। 
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