{"_id":"5ddd01e98ebc3e54ca641e30","slug":"when-the-reality-of-the-varanasi-silk-expo-was-revealed-the-eyes-of-the-viewers-were-kept-open","type":"story","status":"publish","title_hn":"वाराणसी के सिल्क एक्सपो में जब हकीकत से हुआ वास्ता तो खुली रही गईं देखने वालों की आंखें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वाराणसी के सिल्क एक्सपो में जब हकीकत से हुआ वास्ता तो खुली रही गईं देखने वालों की आंखें
Tue, 26 Nov 2019 04:14 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Tue, 26 Nov 2019 04:14 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बड़ालालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में सोमवार से छह दिवसीय सिल्क एक्सपो की शुरुआत हुई। इसमें रेशम के कीड़े से ककून और ककून से धागे बनने की प्रक्रिया को नजदीक से देखना लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा व स्टॉलों पर काफी भीड़ रही। केंद्रीय उद्योग राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह और उनकी पत्नी भी रेशम बनने की प्रक्रिया देख आश्चर्यचकित रह गए।
विज्ञापन
सिल्क एक्सपो का शुभारंभ करते हुए मंत्री ने कहा कि रेशम के कीड़े अपनी जान देकर बेहतरीन प्रकार के रेशम तैयार करते हैं और लोगों की शोभा बढ़ाते हैं। कहा कि रेशम निदेशालय के अधिकारियों से कहा कि रेशम उत्पादों की व्यवहारिक समस्याओं का समाधान तय समय पर करें।
विज्ञापन
बताया गया कि प्रदेश में तीन तरह के रेशम का उत्पादन होता है। इनमें टशर, शहतूती और एरी हैं। टशर का उत्पादन अर्जुन, एरी का अरंडी और शहतूती रेशम का शहतूत के पौधे पर होता है। रेशम निदेशालय के सहायक निदेशक डॉ. एके सोनी ने बताया कि कीड़े की लार से रेशम का धागा तैयार होता है। रेशम उत्पादों को प्रशिक्षण के लिए निदेशालय ने बरकछा में सरदार पटेल प्रशिक्षण संस्थान खोला है।
विज्ञापन
उद्योग राज्य मंत्री सपत्नीक सिल्क एक्सपो में पहुंचे थे। उन्होंने रेशम उत्पादकों से धागा बनने की प्रक्रिया को समझा और जिज्ञासा दिखाते हुए सवाल भी पूछे। सिल्क एक्सपो में उत्तर प्रदेश के अलावा जम्मू-कश्मीर, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल के बुनकर आए हैं। इनके बुने साड़ी, दुपट्टे, ड्रेस मैटेरियल, सदरी, शॉल के स्टॉल लगे हैं। रेशम निदेशक व विशेष सचिव नरेंद्र सिंह पटेल, सहायक निदेशक रणवीर सिंह, हथकरघा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नितेश धवन आदि मौजूद थे।