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उपकेंद्र ठप हो जाए जलती रहेगी बिजली
वाराण्ासी, ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2015 01:44 AM IST
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वाराणसी। पक्के महाल के 16 वर्ग किलोमीटर इलाके में बिजली के तार भूमिगत तो किए ही जाएंगे। साथ ही उपकेंद्रों को इस तरह बनाया जाएगा कि बिजली गुल होते उससे जुड़े इलाकों को दूसरे उपकेंद्रों से आपूर्ति मिलने लगेगी। लोगों को पावर कट का एहसास तक नहीं होगा।
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इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्किम (आईडीपीएस) के तहत केंद्र सरकार इसके लिए 515 करोड़ रुपये मुहैया कराएगी। गुरुवार को इसकी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई।
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आईडीपीएस योजना के तहत गोरखपुर, इलाहाबाद और वाराणसी शहरों की विद्युत वितरण प्रणाली को अनवरत 24 घंटे विद्युत आपूर्ति करने लायक बनाया जाना है। बुधवार को केंद्रीय संयुक्त सचिव ऊर्जा पीके सिन्हा और पावर फाइनेंस कारपोरेशन के अधिकरियों ने बनारस के विद्युत सुधार के प्रस्ताव की समीक्षा की थी।
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गुरुवार को ऊर्जा सचिव पीके सिन्हा भी जौनपुर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। बाबतपुर हवाई अड्डे पर उन्होंने पूर्वांचल के अधिकारियों के साथ बैठक में बनारस से जुड़ी योजना की समीक्षा की और कुल 515 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी।
डा. काजल ने बताया कि आईडीपीएस के तहत भूमिगत केबल बिछाने का प्राविधान नहीं है लेकिन बनारस के हेरिटेज सिटी होने के कारण पक्का महाल इलाके में इसकी मंजूरी मिल गई है। गंगा के किनारे दो किलोमीटर की चौड़ाई में सभी केबल भूमिगत किए जाएंगे। इससे बिजली चोरी रुकेगी और लोगों को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति मिल पाएगी। इसके साथ ही उपकेंद्रों की क्षमता भी दो गुना से ज्यादा करने की योजना है।
आरएपीडीआरपी के तहत 299 करोड़ रुपये से वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने का काम अगले महीने शुरू हो जाएगा। आरएपीडीआरपी और आपीडीएस के काम हो जाने के बाद बनारस में बिजली का संकट नहीं रह जाएगा। ऐसा होने के बाद किसी भी इलाके की बिजली गुल होने पर उसका भार दूसरे उपकेंद्र पर डाल दिया जाएगा। यह काम आटोमैटिक तरीके से हो जाएगा। उपभोक्ता को अपने इलाके के उपकेंद्र की खराबी का पता तक नहीं चल पाएगा।