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बीएचयू में तैयार ‘मालवीय 838’ से लहलहाएगी गेहूं की फसल
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बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से विकसित गेहूं की नई प्रजाति के बीज मालवीय 838 से फसल लहलहाएगी। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) की ओर से रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में मालवीय 838 बीज को देश को समर्पित किया। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. रमेश चंद ने संस्थान के वैज्ञानिकों को बधाई देकर इसे बड़ी उपलब्धि बताया है।
मालवीय 838 को विकसित करने वाली टीम के प्रमुख सदस्य प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि इस प्रजाति की उत्पादन क्षमता एक हेक्टेयर में 50 क्विंटल है जबकि सामान्य बीज की क्षमता 40 से 45 क्विंटल है। इसमें अधिक उपज के साथ-साथ जिंक और आयरन की मात्रा भी अधिक है तथा कम पानी में अधिक उत्पादन देती है। करीब छह साल की मेहनत के बाद सफलता मिली है। प्रोफेसर हेमंत कुमार जायसवाल, डॉ. संदीप शर्मा, प्रो. रमेश कुमार सिंह, प्रो. रमेश चंद और प्रो. श्याम शरण का प्रमुख योगदान रहा।
ब्लास्ट बीमारी का भी असर नहीं
बांग्लादेश में ब्लास्ट नाम की बीमारी बड़ी तेजी से फैली है। आईसीएआर के नियमानुसार मालवीय 838 को जांच के लिए बांग्लादेश भी भेजा गया। पाया गया कि इस पर बीमारी का कोई असर नहीं है। अगर बांग्लादेश से सटे भारत के राज्यों में इस प्रजाति को उगाया जाए तो हम इस बीमारी को भारत में आने से रोक सकते हैं।
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मालवीय 838 को विकसित करने वाली टीम के प्रमुख सदस्य प्रो. विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि इस प्रजाति की उत्पादन क्षमता एक हेक्टेयर में 50 क्विंटल है जबकि सामान्य बीज की क्षमता 40 से 45 क्विंटल है। इसमें अधिक उपज के साथ-साथ जिंक और आयरन की मात्रा भी अधिक है तथा कम पानी में अधिक उत्पादन देती है। करीब छह साल की मेहनत के बाद सफलता मिली है। प्रोफेसर हेमंत कुमार जायसवाल, डॉ. संदीप शर्मा, प्रो. रमेश कुमार सिंह, प्रो. रमेश चंद और प्रो. श्याम शरण का प्रमुख योगदान रहा।
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ब्लास्ट बीमारी का भी असर नहीं
बांग्लादेश में ब्लास्ट नाम की बीमारी बड़ी तेजी से फैली है। आईसीएआर के नियमानुसार मालवीय 838 को जांच के लिए बांग्लादेश भी भेजा गया। पाया गया कि इस पर बीमारी का कोई असर नहीं है। अगर बांग्लादेश से सटे भारत के राज्यों में इस प्रजाति को उगाया जाए तो हम इस बीमारी को भारत में आने से रोक सकते हैं।
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