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महामना को ये कैसी श्रद्धांजलि

Thu, 07 Apr 2016 02:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 07 Apr 2016 02:15 AM IST
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What a tribute to the high-minded
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समयबद्धता और काम के प्रति पूर्ण समर्पण महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन का मूल मंत्र था। बीएचयू की स्थापना इसका पुख्ता प्रमाण है। समय और समर्पण के बल पर ही उन्होंने अपनी इतनी बड़ी प्रतिज्ञा पूरी की लेकिन आज बीएचयू खुद ही उनकी इस सीख को बिसरा बैठा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं महामना के 150वें जन्मशती समारोह पर उनके नाम पर शुरू हुईं दो योजनाएं, जो निर्धारित समय के बाद भी मूर्तरूप नहीं ले सकी हैं। ताज्जुब तो ये है कि इन योजनाओं के नाम पर 90 लाख से अधिक रुपये भी खर्च हो चुके हैं।
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वर्ष 2012 में महामना की 150वीं जन्म शताब्दी का उत्सव बीएचयू ने ही नहीं बल्कि भारत सरकार ने भी मनाया था। इसके लिए नेशनल इम्प्लीमेंटेशन कमेटी का गठन किया था। उत्सव के तहत ही महामना के नाम पर कई योजनाएं बनाई गई थीं। इसमें महामना के नाम पर डाक टिकट से लेकर स्मारक सिक्के भी जारी किए गए। इन्हीं में दो महत्वपूर्ण योजनाएं और थीं, एक महामना के नाम पर वेबसाइट और दूसरा महामना के जीवन से जुड़े दस्तावेजों का संकलन कर उनका आर्काइव तैयार करना।
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इसके लिए महामना शोध संस्थान (मालवीय हेरिटेज कॉम्प्लेक्स) का निर्माण होना था, जहां ये आर्काइव डिजिटल और भौतिक रूप में प्रदर्शित होनी है। बीएचयू के ओएसडी डॉ. विश्वनाथ पांडेय के अनुसार वेबसाइट के लिए संस्कृति मंत्रालय ने 15 लाख और आर्काइव के लिए दो करोड़ रुपये जारी किए थे। हालांकि अब तक महामना के नाम पर कोई वेबसाइट नहीं बनी। वहीं आर्काइव के काम के लिए शोध संस्थान के निर्माण का इंतजार हो रहा है। संस्थान के निर्माण कार्य की मियाद पिछले साल ही पूरी हो चुकी है लेकिन वो काम अभी भी अधूरा है। इससे जाहिर है कि शायद खुद विश्वविद्यालय प्रशासन को ही इसकी फिक्र नहीं रह गई है। फिक्र होती तो कम से कम समयबद्धता, संकल्पबद्धता की मिसाल महामना के नाम से जुड़ी इन योजनाओं का हाल ऐसा नहीं होता।
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जुटाए जा रहे अभिलेख
आर्काइव तैयार करने का काम इतिहास विभाग के डॉ. ध्रुव कुमार सिंह का है। उनका कहना है कि देश भर से महामना से जुड़े अभिलेख जुटाए जा रहे हैं। उनका डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। इनकी कैटेलॉगिंग की जा रही है। हम अपना काम कर रहे हैं लेकिन हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के निर्माण के चलते योजना अब तक मूर्तरूप नहीं ले पाई है।  


राष्ट्रपति ने किया था उद्घाटन
वाराणसी। महामना के 150वें जन्मशती समारोह का समापन 25 दिसंबर 2012 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विशेष दीक्षांत समारोह के तौर पर हुआ था। बतौर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शिरकत की थी। चूंकि उस वक्त तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ था इसलिए अस्थायी तौर पर महामना वेबसाइट बनाकर उनसे उद्घाटन करा दिया गया था। उसी समय राष्ट्रपति ने महामना के उस शोध संस्थान का शिलान्यास भी किया था, जहां ये आर्काइव प्रदर्शित होनी है लेकिन तकरीबन दो साल तक इस भवन का निर्माण ही शुरू नहीं कराया जा सका था। बाद में काम शुरू हुआ तो वह भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

ये होना है आर्काइव में
महामना का जीवन परिचय। जिन जिन भाषाओं में अब तक महामना की जीवनी प्रकाशित हुई है, उनका संकलन तथा हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद।
महामना से जुड़े दस्तावेज जैसे कि उनके भाषण, संदेश, पत्र, लेख, अभिलेख, उनके साक्षात्कारों का संकलन व उनका डिजिटलाइजेशन।
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