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Varanasi News: माैसम की बेवफाई ने तरबूज की कीमतें घटार्ईं

Sun, 07 May 2023 12:10 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 May 2023 12:10 AM IST
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weather's infidelity reduced the prices of watermelons
किसानों ने तरबूज का रकबा बढ़ाया तो मौसम ने नहीं दिया साथ
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मौसम की मार से तरबूज की मांग हुई कम, किसान हाे रहे परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
बारा। कभी बाढ़, कभी सूखा और अब बेमौसम बारिश की मार झेलते किसान बेहाल हैं। कर्मनाशा नदी के तट पर सायर गांव में पिछले कुछ वर्षों से गर्मी के सीजन में तरबूज की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है। इस बार तरबूज की फसल पर मौसम की मार है। इस समय फसल तैयार है। यहां का तरबूज जिले सहित बिहार की मंडियों तक पहुंच रहा है लेकिन मौसम में आए बदलाव के कारण मांग कम हो गई है। नतीजा, तरबूज का भाव गिर गया है। पांच रुपये प्रति किलो की दर से थोक में तरबूज बिक रहा है। इससे किसानों को बड़ा नुकसान हो रहा है। सेवराई तहसील के सायर गांव में कर्मनाशा नदी के तट पर किसानों ने तरबूज का रकबा बढ़ाया तो लेकिन मौसम ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया। पिछले दिनों तेज हवा और बारिश के कारण तापमान में गिरावट आ गई और गर्मी के मौसम में भी तरबूज की खपत कम हो गई। हर दिन यहां से लगभग 500 कुंतल तरबूज बिहार राज्य के बक्सर, आरा, डुमरांव, कैमूर, सासाराम की मंडियों में जाता है।
इस बार मंडियों में मांग सिर्फ इस कारण कम है वजह गर्मी कम हो गई है। तापमान में गिरावट आने से लोग तरबूज खाना पसंद नहीं कर रहे हैं। हर दिन बदलते मौसम के कारण तरबूज की फसल में रोग का प्रकोप भी दिख रहा है। कर्मनाशा नदी के तट पर सायर गांव में हर वर्ष कम समय में अच्छे मुनाफे के लिए किसान तरबूज की खेती करते हैं।
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इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव के चलते रात को ठंड एवं दिन में गर्मी होने से तरबूज की फसल में फंगस रोग देखने को मिल रहा है। किसान अशोक यादव, जयसिंह यादव, मुखलाल चौधरी, राजनाथ यादव, लक्ष्मण यादव, परशुराम चौधरी, प्रभुनारायण यादव, छट्ठू चौधरी ने बताया कि इस वर्ष बार-बार बदलता मौसम फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। गर्मी तरबूज की फसल के लिए अच्छी रहती है। इस समय आए दिन बादल होने से रात-दिन के तापमान में ज्यादा गैप होने से तरबूज के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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मौसम के कारण फल में फंगस रोग लगने से उत्पादन घट गया है। हाल ही में हुई कई बार बारिश से भी फसल को नुकसान पहुंचा है। मई माह के पहले पखवारे में भी मौसम गर्म नहीं हो पाया है। ऐसे में गर्मी के दिनों में सर्वाधिक पसंद किए जाने वाला तरबूज अब लोगों को आकर्षित नहीं कर रहा है।

सायर गांव में कर्मनाशा नदी के तट पर लगभग सौ बीघे से अधिक भूमि पर किसानों ने इस बार तरबूज की खेती की है। मौसम साथ देता है तो आमदनी अच्छी हो जाती है लेकिन इस बार विपरीत मौसम ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। बाजार में तरबूज की मांग मई के पहले पखवारे में महज 25 प्रतिशत ही है। अब लागत निकाल पाना भी किसानों के लिए मुश्किल हो गया है।
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