पास आए तो कर लूंगी आत्मदाह: मकान कब्जामुक्त कराने पहुंची थी पुलिस, दो बहनों ने खुद को कमरे में किया बंद
कोर्ट के आदेश पर मकान खाली कराने पहुंची पुलिस और राजस्व टीम को अजीब सी स्थिति का सामना करना पड़ा। घटना वाराणसी के वरुणा विहार कॉलोनी की है।
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वाराणसी के वरुणा विहार कॉलोनी में शनिवार को न्यायालय के आदेश पर मकान खाली कराने पहुंची कैंट पुलिस और राजस्व टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मकान में मौजूद दो लड़कियों ने विरोध करते हुए कमरे को अंदर से बंद कर लिया और गैस सिलिंडर से आत्मदाह की धमकी दी। मौके पर एसडीएम सदर, एडीसीपी, एसीपी कैंट और अधिवक्ता के समझाने बुझाने के बाद लड़कियों ने दरवाजा खोला। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली।
कैंट थाना अंतर्गत वरुणा विहार कॉलोनी स्थित वाराणसी बालिका इंटर कॉलेज के पीछे मुरारीलाल और उनकी बेटी प्रमिला देवी के बीच पिछले कुछ वर्षों से संपत्ति को लेकर विवाद है। एसडीएम सदर न्यायालय ने 11 सितंबर 2021 को मुरारीलाल के पक्ष में फैसला दिया, जिसे प्रमिला ने हाईकोर्ट में अपील की।
लड़कियों की धमकी से पीछे हटी टीम
हाईकोर्ट ने अगली तारीख पर जिलाधिकारी वाराणसी को 19 दिसंबर 2022 को जवाब की फाइल तैयार कर पेश होने का आदेश दिया। उसी आदेश का पालन कराने के लिए सुबह 10 बजे एसडीएम सदर जयदेव और तहसीलदार योगेंद्र शरण शाह की राजस्व टीम सहित एडीसीपी कैंट मनीष शांडिल्य और एसीपी कैंट अतुल अंजान त्रिपाठी पहुंचे।
अधिकारियों के आने के कुछ देर पहले ही प्रमिला की दो लड़कियां शिवानी और चांदनी ने अपने अलग-अलग कमरों में बंद कर लिया और गैस सिलिंडर और पेट्रोल से आत्मदाह की धमकी देने लगी। यह देखते ही पुलिस और राजस्व टीम पीछे हो गई।
फायर ब्रिगेड सहित पुलिस की और टीम बुला ली गई। समझाने-बुझाने का सिलसिला चलता रहा। मगर, दोनों बहनें किसी भी तरह मानने को तैयार नहीं थी। अंत में प्रमिला देवी के अधिवक्ता राकेश सिंह पहुंचे और उन्होंने समझा-बुझाकर दरवाजा खुलवाया। तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
ये है पूरा मामला
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुरारी लाल के परिवार में पत्नी हीरावती देवी के दो पुत्र गिरधारी लाल और बनवारी लाल सहित चार पुत्रियां हैं। जिनमें तीन बेटियों निर्मला, उर्मिला, विमला अपने ससुराल में रहती हैं। चौथी बेटी प्रमिला अपने पति हीरालाल और तीन बेटियों और दो बेटे के संग वरुणा किनारे तीन बिस्वा जमीन पर बने दो कमरों में रहते थे। मात्र एक कमरे में मुरारीलाल का कब्जा था। जिसका झगड़ा काफी दिनों से एसडीएम सदर के न्यायालय में चल रहा था।