Varanasi News: नालों में बह जा रहा शहर के 2.50 लाख लोगों के हिस्से का पानी, अब जलकर कर रहा ये दावा
Varanasi News: वाराणसी शहर के 2.50 लाख लोगों के हिस्से का पानी नालों में बह जा रहा है। इसके कई कारण हैं। वहीं इस बार गर्मी के सीजन में बेहतर जलापूर्ति का दावा जलकर विभाग द्वारा किया जा रहा है।
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20.63 लाख की आबादी को जलापूर्ति का जिम्मा जलकल उठा रहा है। 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से जलापूर्ति की जा रही है। कई कारणों से 2.50 लाख लोगों के हिस्से का पानी नालों में बह जा रहा है। बीते कई दशकों से जलापूर्ति सुधार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। बावजूद इसके लोगों को पानी के लिए हर गर्मी में जूझना पड़ता है। इस बार भी गर्मी में बेहतर जलापूर्ति का दावा किया जा रहा है।
जलकल का दावा है कि गंगा किनारे बसे शहर बनारस का कोई व्यक्ति प्यासा न रहे। लेकिन घरों तक पहुंचने से पहले ही पानी नालों से बहकर निकल जाता है। शहरवासियों की मांग की पूर्ति के लिए कुल 278 एमएलडी (1 एमएलडी में 10 लाख लीटर) पानी की जरूरत है, लेकिन दे रहे हैं 244.25 एमएलडी। यानी बचे हुए 33.75 एमएलडी से 2.50 लाख और लोगों को जलापूर्ति की जा सकती है। लेकिन इतना पानी विभिन्न कारणों से नालों में बह जा रहा है।
शहर में 148 नलकूप हैं। इनमें 39 मिनी नलकूप हैं। भेलूपुर में गंगा से पानी लेकर शोधन करने की व्यवस्था है। पानी को घर-घर पहुंचाने के लिए 1500 किलोमीटर लंबी पाइपों का जाल बिछाया गया है। पानी लीकेज और अन्य कारणों से लॉस हो जाता है।
सिस वरुणा और ट्रांस वरुणा को बांटने के बाद भी जलापूर्ति पर्याप्त नहीं
काशी में जलापूर्ति के लिए शहर को आबादी के हिसाब से दो भागों में बांटा गया है। सिस वरुणा और ट्रांस वरुणा। इसके बाद भी शहर की पानी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। सिस वरुणा में 466 किलोमीटर लंवी पाइपलाइन अंग्रेजों के समय बिछाई गई थी, जो इस वक्त भी चालू है। ट्रांस वरुणा क्षेत्र में 150 किलोमीटर पुरानी पाइप लाइन से जलापूर्ति हो रही है। इन पाइपलाइन को बिछे कई साल बीत चुके हैं। ये डैमेज भी होती जा रही हैं। जिसकी वजह से घरों में न सिर्फ गंदा पानी पहुंच रहा है, बल्कि हर रोज पानी नालों में बह रहा है। शहर के अधिकांश इलाकों में पुरानी पाइप लाइन होने की वजह से पानी को नालों में बहने से रोक पाना जलकल के बस की बात नहीं है।
भूमिगत वाटर लाइन फॉल्ट ढूंढने की कोई तकनीक नहीं
जलकल की ओर से भूमिगत वाटर लाइन फॉल्ट ढूंढने की कोई तकनीक नहीं है। ड्रिलिंग के चलते पाइप लाइनों में हुए छेद से हो रही दूषित जलापूर्ति, लीकेज आदि का पता लगाने के लिए थोड़ी थोड़ी दूरी पर सड़कों की खोदाई करनी पड़ती है। बिजली विभाग में फॉल्ट लोकेटर मशीन है। जो यह बता देती है कहां पर तार पंचर है, लेकिन जलकल के पास इस तरह का कोई फॉल्ट लोकेटर मशीन नहीं है।
क्या बोले अधिकारी
शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए बड़ा काम होने जा रहा है। शहर के प्राने 18 वाडों की सीवर और पेयजल लाइन बदली जाएगी। ज्यादातर पानी की समस्या इन्हीं वार्डों में है। यह काम पूरा होने के बाद यहां पानी से जुडी हर प्रकार की समस्याओं का समाधान हो जाएगा। जल्द ही काम शुरू होने वाला है। -अनूप कुमार सिंह, महाप्रबंधक जलकल