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काशी में तेजी से सीढ़ियां चढ़ रहीं गंगा, आरती की खोल दी गई छतरियां, जानें हर घंटे कितना बढ़ रहा पानी

Fri, 12 Jul 2019 12:01 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 12 Jul 2019 12:01 AM IST
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water level increase 2 cm per hour in ganga after heavy rain varanasi
गंगा का बढ़ रहा जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला

गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गुरुवार शाम पांच बजे तक जलस्तर बढ़ने की गति दो सेमी प्रति घंटा थी। 48 घंटे के भीतर दशाश्वमेध घाट की चार सीढ़ियां डूब चुकी हैं। ऐसे में घाट किनारे सतर्कता बरती जा रही है। गंगा के सीढ़ियों के चढ़ने के चलते गंगा आरती के लिए लगाई गई छतरी हटा ली गई हैं। सावधानी के लिए दशाश्वमेध और अस्सी घाट किनारे लगी जेटी हटाई गई।

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मानसूनी बारिश से पूर्वांचल के सभी छोटे-बड़े नदी नाले भर गए हैं। गंगा की सहायक नदियां असि और वरुणा का जलस्तर भी बढ़ गया है। इन सभी से पानी पहुंचने के कारण भी गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। बुधवार रात हुई बारिश का असर गुरुवार को भी दिखा।
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केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गुरुवार को गंगा का जलस्तर हर घंटे दो सेमी बढ़ा। कंट्रोल रूम के अनुसार, बुधवार को गंगा का जलस्तर 58.96 मीटर था, जबकि गुरुवार रात 10 बजे गंगा का जलस्तर 66 सेमी बढ़कर 59.24 मीटर हो गया। गंगा का जलस्तर बढ़ने का क्रम अभी जारी है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार गंगा के बढ़ने का क्रम प्रति घंटे दो सेमी है।

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9 नवंबर 1978 को काशी में गंगा का जलस्तर 73.90 मीटर रहा। खतरे का निशान 71.26 और चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है। बारिश का 60 फीसदी से अधिक जल गंगा के माध्यम से काशी पहुंचता है। गंगा के अपस्ट्रीम में अगले कुछ दिनों में ऐसी बारिश हुई तो काशी में गंगा की और सीढ़ियां डूबेगी। गंगा की डाउन स्ट्रीम गाजीपुर और बलिया तक पड़ेगा। 

वरुणा और अस्सी में भी बढ़ा जलस्तर :
बारिश के चलते ही वरुणा नदी का भी जलस्तर बहुत ही बढ़ गया है। इससे वरुणा नदी के किनारे के घाटों पर पानी चढ़ गया है। इससे इलाके के लोग सतर्क हो गए हैं। वहीं असि नदी में भी जल का बहाव तेजी से बढ़ गया है।

न्यूनतम जलस्तर को पार किया :
गंगा में सामान्य रूप से 58 मीटर पानी होना चाहिए। तब जाकर गंगा का प्रवाह सही रहता है। गर्मी में गंगा उससे भी नीचे पहुंच गई थी। इससे शहर में पेयजल का संकट हो गया था। अब गंगा अपने न्यूनतम जलस्तर से सवा मीटर ऊपर हुई हैं।

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