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काशी के नाटककार व्योमेश शुक्ल को उस्ताद बिसमिल्लाह खां युवा पुरस्कार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 20 Jun 2018 05:59 PM IST
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व्योमेश शुक्ल
- फोटो : अमर उजाला
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अपने नाटकों से देशभर में बनारस की सभ्यता और संस्कृति का परचम लहराने वाले रंगसमूह रूपवाणी के निर्देशक व्योमेश शुक्ल को संगीत नाटक अकादमी की ओर से 2017 के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। युवा पुरस्कारों की सूची में शुक्ल उत्तर प्रदेश से अकेले हैं। यही नहीं, रंगमंच के क्षेत्र में अकादमी का यह पुरस्कार पहली बार वाराणसी को मिलेगा।
डॉ. शकुंतला शुक्ल द्वारा स्थापित काशी की 40 वर्ष पुरानी नाट्य संस्था रूपवाणी अब शुक्ल के हाथ में है। सात साल पहले इससे जुड़े शुक्ल के निर्देशन में संस्था ने राम की शक्तिपूजा, चित्रकूट, कामायनी, रश्मिरथी और पंचरात्रम नाटक तैयार किए हैं।
बीते साल राम की शक्तिपूजा को भारत रंग महोत्सव में आमंत्रित किया गया और इस साल पंचरात्रम को थिएटर ओलंपिक्स का न्योता मिला। बीते दिनों फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस आगमन के पर रूपवाणी ने रामलीला के शिल्प में चित्रकूट नाटक की प्रस्तुति दी थी। आने वाले दिनों में शुक्ल की टीम शेक्सपियर की कालजयी रचना मैकबेथ नाटक का मंचन करने जा रही है।
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वहीं बनारस घराने के बांसुरी एवं शहनाई वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें दोनों ही विधाओं में सिद्धहस्तता के फलस्वरूप मिला है। बनारस की परंपरा को आगे ले जाते हुए पं. राजेंद्र प्रसन्ना को ये सम्मान मिलना बनारस की गरिमा को आगे बढ़ता है।
प्रसन्ना ने अपने बांसुरी वादन और शहनाई वादन से देश ही नहीं, विदेश में बनारस का मान सम्मान और गौरव को आगे बढ़ाया है। इससे पूरी काशी के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
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डॉ. शकुंतला शुक्ल द्वारा स्थापित काशी की 40 वर्ष पुरानी नाट्य संस्था रूपवाणी अब शुक्ल के हाथ में है। सात साल पहले इससे जुड़े शुक्ल के निर्देशन में संस्था ने राम की शक्तिपूजा, चित्रकूट, कामायनी, रश्मिरथी और पंचरात्रम नाटक तैयार किए हैं।
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बीते साल राम की शक्तिपूजा को भारत रंग महोत्सव में आमंत्रित किया गया और इस साल पंचरात्रम को थिएटर ओलंपिक्स का न्योता मिला। बीते दिनों फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस आगमन के पर रूपवाणी ने रामलीला के शिल्प में चित्रकूट नाटक की प्रस्तुति दी थी। आने वाले दिनों में शुक्ल की टीम शेक्सपियर की कालजयी रचना मैकबेथ नाटक का मंचन करने जा रही है।
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वहीं बनारस घराने के बांसुरी एवं शहनाई वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें दोनों ही विधाओं में सिद्धहस्तता के फलस्वरूप मिला है। बनारस की परंपरा को आगे ले जाते हुए पं. राजेंद्र प्रसन्ना को ये सम्मान मिलना बनारस की गरिमा को आगे बढ़ता है।
प्रसन्ना ने अपने बांसुरी वादन और शहनाई वादन से देश ही नहीं, विदेश में बनारस का मान सम्मान और गौरव को आगे बढ़ाया है। इससे पूरी काशी के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।