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वॉलीबॉल: तकनीक, रफ्तार और रिफ्लेक्स का तालमेल, महज तीन सेकेंड में लेना होता है फैसला; आशीष ने बताए तरीके

Thu, 08 Jan 2026 06:03 AM IST
अमन विश्वकर्मा रोहित चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
रोहित चतुर्वेदी, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 08 Jan 2026 06:03 AM IST
सार

Varanasi News: पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी और प्रतियोगिता की तकनीकी समिति के सदस्य डॉ. आशीष कुमार सिंह इस खेल को लेकर खास जानकारियां दी। वे खेल के महाकुंभ में खिलाड़ियों खास तकनीक भी बता रहे हैं।

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Volleyball combination of technique speed reflexes decisions made in three seconds Ashish explained
पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी और प्रतियोगिता की तकनीकी समिति के सदस्य डॉ. आशीष कुमार सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वॉलीबॉल देखने में भले ही आसान खेल लगे लेकिन इसे खेलना दिमाग, तकनीक और रिफ्लेक्स का असाधारण तालमेल मांगता है। गेंद हवा में उड़ती नहीं, बल्कि गोली की रफ्तार से खिलाड़ी की ओर आती है। ऐसे में खिलाड़ी के पास फैसला लेने के लिए महज तीन सेकेंड का समय होता है, कि वह रिसीव करे, पास दे या फिर अटैक खेले।

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सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रही 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में यह नजारा साफ देखने को मिल रहा है। पुरुष और महिला वर्ग के खिलाड़ी जब सर्विस करते हैं, तो गेंद की गति 110 से 115 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है। इतनी तेज रफ्तार में गेंद महज तीन सेकेंड में विपक्षी पाले में पहुंच जाती है। 
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पूर्व वॉलीबाल खिलाड़ी और प्रतियोगिता की तकनीकी समिति के सदस्य डॉ. आशीष कुमार सिंह बताते हैं, तेज गति से आती गेंद पर खिलाड़ी को पलक झपकते निर्णय लेना होता है कि वह किस तरह का शॉट खेलेगा। एक छोटी सी चूक पूरे पॉइंट का रुख बदल सकती है। यही वजह है कि वॉलीबॉल में तकनीक के साथ-साथ मानसिक सतर्कता भी उतनी ही जरूरी होती है।

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इनडोर और आउटडोर में बदल जाती है गेंद की चाल
आशीष के अनुसार इनडोर और आउटडोर कोर्ट में गेंद की गति और व्यवहार में अंतर आ जाता है। इनडोर स्टेडियम में हवा का असर कम होने से गेंद अपेक्षाकृत स्थिर रहती है, जबकि आउटडोर में मौसम और हवा गेंद की दिशा और रफ्तार को प्रभावित करती है। खिलाड़ियों को दोनों परिस्थितियों में खुद को ढालना पड़ता है। 

तेज गति से आती गेंद को नियंत्रित करने के लिए खिलाड़ी अपनी अंगुलियों को विशेष कोण पर स्थिर रखते हैं। इससे न सिर्फ गेंद की रफ्तार को कम किया जाता है, बल्कि अंगुलियों को चोटिल होने से भी बचाया जाता है। वॉलीबॉल का वजन 260 से 280 ग्राम के बीच होता है लेकिन स्मैश के दौरान गेंद की रफ्तार और दबाव कई गुना बढ़ जाती है। वॉलीबॉल के खेल में मौसम का प्रभाव भी अहम होता है। नमी, तापमान और हवा गेंद की गति और उछाल को प्रभावित करते हैं।

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