ब्रिक्स डायलाग में गूंजी ग्रामीण भारत की आवाज: रतसर की स्मृति सिंह शामिल हुईं, उपलब्धियों को बताया; जानें खास
ब्रिक्स डायलॉग में ग्रामीण भारत की आवाज पहुंची। उत्तर प्रदेश से रतसर की स्मृति सिंह ने एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों और वहां की चुनौतियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा। स्मृति की भागीदारी से ग्रामीण भारत के अनुभवों और सरोकारों को वैश्विक संवाद में स्थान मिला।
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दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स डायलाग में कस्बा निवासी निवर्तमान प्रधान स्मृति सिंह ने सहभागिता कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ग्रामीण भारत की आवाज बुलंद की। उत्तर प्रदेश से इस संवाद में वह एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने ब्रिक्स देशों से आए विदेशी प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए भारत और विशेष रूप से ग्रामीण भारत की उपलब्धियों, चुनौतियों और बदलते स्वरूप को साझा किया।
संवाद के दौरान स्मृति सिंह ने महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा नेतृत्व, स्वच्छता और सामाजिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं की बढ़ती भागीदारी तथा जमीनी स्तर पर हो रहे सकारात्मक बदलावों की जानकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के समक्ष रखी।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत अब केवल विकास योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि बदलाव का सक्रिय भागीदार बन रहा है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से गांवों में सामाजिक विकास की नई तस्वीर उभर रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ग्रामीण समाज की वास्तविक तस्वीर और उसकी आकांक्षाओं को सामने रखना जरूरी है।
स्मृति सिंह ने कहा कि ब्रिक्स डायलाग जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बात रखने और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण समाज, महिलाओं एवं युवाओं की आवाज वैश्विक प्रतिनिधियों तक पहुंचाने का अवसर उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच महिला नेतृत्व, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा सहभागिता के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।
स्मृति सिंह ने कहा कि भारत हर क्षेत्र में नया इतिहास लिख रहा है। अब इसका असर विदेशियों में भी साफ दिखाई देता है। उनकी बातों से ये परिलक्षित होता है कि भारत एक विकसित देश के रुप में स्थापित हो रहा है। उसके बाद प्रचुर क्षमता है बस उसे प्रदर्शित करने के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म की आवश्यकता है। विकसित देशों के नागरिकों की मानसिकता भारत के प्रति काफी बदली है और सकारात्मक हुई है। यूपी में आगे बढ़ने का मौका बढ़ है इसे फारेन डेलीगेट्स के सामने रखा गया, अब ये लोग भारत को अमेरिका, फ्रांस और रुस जैसे देशों के साथ देख रहे है। ये बदलते भारत की तस्वीर है।