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संक्रमण काल में बच्चों को विटामिन डी की खुराक होगी फायदेमंद
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वाराणसी। वैश्विक महामारी की तीसरी लहर में बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए शासन व प्रशासन स्तर से कवायद शुरू हो गई है। बुधवार को भाजपा की ओर से शहर के बाल रोग विशेषज्ञों से ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया।
इसमें डाक्टरों ने अस्पताल में बच्चों के इलाज को लेकर चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि वार्ड में बच्चों का अकेले रहना संभव नहीं है। इसलिए अधिक संख्या में पीपीई किट का इंतजाम करना होगा। टाइम स्लॉट के अनुसार परिवार के सदस्यों को उनकी तीमारदारी करनी होगी। बीएचयू के प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि बच्चों के लिए जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज को चिह्नित किया जाना चाहिए। नवजात व उससे बड़े बच्चों के लिए संसाधनों की मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी क्योंकि बच्चों का वेंटिलेटर और पल्स ऑक्सीमीटर अलग होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप जिंदल ने कहा कि बच्चों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों को चिह्नित करना होगा। डॉ. राजेश खन्ना ने कहा कि सरकार से अनुमति लेकर 12 साल से ऊपर के बच्चों को वैक्सीनेट किया जाना चाहिए। वैक्सीनेशन से ही कोरोना की रफ्तार को रोका जा सकता है। डॉ. आलोक सी भारद्वाज ने कहा कि निजी और राजकीय चिकित्सालयों को मिलकर काम करना होगा। वैक्सीनेशन तेज किया जाए। बाल रोग विशेषज्ञों का एक ग्रुप बनाया जाए। डॉ. बृजेश कुमार ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि छोटे बच्चों को अलग रखना मुश्किल है। इसके लिए अभिभावकों को जागरूक होना पड़ेगा। घर में पीपीई किट आदि की व्यवस्था करनी होगी। डॉ. दिव्यांग पाठक ने कहा कि हल्के लक्षण पर डाक्टर का परामर्श हितकर होगी। सभी इक्यूपमेंट आदि की मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी। डॉ. केके ओझा ने कहा कि वैक्सीनेशन से ही प्रकोप को कम किया जा सकता है। विधान परिषद के उपनेता लक्ष्मण आचार्य ने जानना चाहा कि ऐसी परिस्थिति में क्या बच्चों को पूर्व में ही कोई दवा देकर सुरक्षित किया जा सकता है। चिकित्सकों ने कहा कि बच्चों को वजन के हिसाब से दवा की डोज दी जाती है, इसलिए कोई विशेष दवा नहीं है लेकिन बच्चों को विटामिन डी दिया जा सकता है।राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि दूसरी लहर अकस्मात आई। ईश्वर से प्रार्थना है कि तीसरी न आए लेकिन यदि जरा भी आशंका दिखाई देती है तो काशी कैसे सतर्क रहे, सुरक्षित रहे और काशी को इसके प्रकोप से कैसे बचाया जाए, इस पर काम होना चाहिए। विधायक डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, सुरेंद्र नारायण सिंह, डॉ. अमित जैन, डॉ. मधुकर पांडेय ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. एनपी सिंह ने किया।
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इसमें डाक्टरों ने अस्पताल में बच्चों के इलाज को लेकर चिंता जाहिर की। उनका कहना था कि वार्ड में बच्चों का अकेले रहना संभव नहीं है। इसलिए अधिक संख्या में पीपीई किट का इंतजाम करना होगा। टाइम स्लॉट के अनुसार परिवार के सदस्यों को उनकी तीमारदारी करनी होगी। बीएचयू के प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि बच्चों के लिए जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज को चिह्नित किया जाना चाहिए। नवजात व उससे बड़े बच्चों के लिए संसाधनों की मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी क्योंकि बच्चों का वेंटिलेटर और पल्स ऑक्सीमीटर अलग होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप जिंदल ने कहा कि बच्चों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों को चिह्नित करना होगा। डॉ. राजेश खन्ना ने कहा कि सरकार से अनुमति लेकर 12 साल से ऊपर के बच्चों को वैक्सीनेट किया जाना चाहिए। वैक्सीनेशन से ही कोरोना की रफ्तार को रोका जा सकता है। डॉ. आलोक सी भारद्वाज ने कहा कि निजी और राजकीय चिकित्सालयों को मिलकर काम करना होगा। वैक्सीनेशन तेज किया जाए। बाल रोग विशेषज्ञों का एक ग्रुप बनाया जाए। डॉ. बृजेश कुमार ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि छोटे बच्चों को अलग रखना मुश्किल है। इसके लिए अभिभावकों को जागरूक होना पड़ेगा। घर में पीपीई किट आदि की व्यवस्था करनी होगी। डॉ. दिव्यांग पाठक ने कहा कि हल्के लक्षण पर डाक्टर का परामर्श हितकर होगी। सभी इक्यूपमेंट आदि की मुकम्मल व्यवस्था करनी होगी। डॉ. केके ओझा ने कहा कि वैक्सीनेशन से ही प्रकोप को कम किया जा सकता है। विधान परिषद के उपनेता लक्ष्मण आचार्य ने जानना चाहा कि ऐसी परिस्थिति में क्या बच्चों को पूर्व में ही कोई दवा देकर सुरक्षित किया जा सकता है। चिकित्सकों ने कहा कि बच्चों को वजन के हिसाब से दवा की डोज दी जाती है, इसलिए कोई विशेष दवा नहीं है लेकिन बच्चों को विटामिन डी दिया जा सकता है।राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि दूसरी लहर अकस्मात आई। ईश्वर से प्रार्थना है कि तीसरी न आए लेकिन यदि जरा भी आशंका दिखाई देती है तो काशी कैसे सतर्क रहे, सुरक्षित रहे और काशी को इसके प्रकोप से कैसे बचाया जाए, इस पर काम होना चाहिए। विधायक डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, सुरेंद्र नारायण सिंह, डॉ. अमित जैन, डॉ. मधुकर पांडेय ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. एनपी सिंह ने किया।
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