Jaunpur: यूथोपिया में बंधक की तरह फंसे युवक की नौ महीने बाद घर वापसी, उसे देखकर परिजन खुशी से झूमे
विपिन ने बताया कि हम लोगों के घर वापसी का नाम लेने पर प्रबंधक हमसे नाराज था। गुस्से में हम लोगों को रविवार का खाना देना बंद कर दिया। हम सभी रविवार को भूखे रहते थे, या बाजार से कुछ खरीद कर खाते थे।
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अफ्रीका महाद्वीप के यूथोपिया में बंधक की तरह फंसा जिले का एक व्यक्ति नौ महीने बाद बुधवार की देर शाम अपने घर पहुंचा। उसे देख कर परिजनो खुशी से झूम उठे। उमरी गांव निवासी विपिन सिंह ने बताया कि वह घर वापसी के लिए नौ महीने से प्रयास कर रहे थे। विदेश मंत्रालय का दबाव पड़ने के कारण मेरी वापसी संभव हुई।
विपिन सिंह ने बताया कि मैं पहली बार साल 2012 में यूथोपिया में रोजगार के लिए गया। वहीं पर एक स्टील कंपनी के प्रबंधक से जान पहचान हुई। कुछ दिन के बाद मैं वापस घर लौट आया। कंपनी के प्रबंधक ने मुझसे साल 2021 में संपर्क किया और मुझे रोजगार देने की बात कही। पुराने संबंध के कारण मैं 23 अगस्त 2021 को मैं वापस यूथोपिया गया। वहां सब ठीक चल रहा था।
बताया कि करीब नौ महीने पहले घर वापसी की बात पर प्रबंधक मेरे सहित 12-13 साथियों से नाराज हो गया। वह वेतन नहीं देता था ताकी हम घर वापस न जा सकें। एक तरह से हम वहां बंधक बन गए थे। वापसी या वेतन की बात पर प्रबंधक हमें डांटता-चिल्लाता था। कुल नौ महीने का वेतन रोक दिया। बाद में सभी लोगों ने एंबेसी में संपर्क किया। एंबेसी से आश्वासन मिला कि एक महीने और नौकरी कीजिए तो नौ महीने का वेतन दिलवाया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
विपिन ने बताया कि तब हमने भारतीय विदेश मंत्रालय को एक्स पर करीब 1000 ट्वीट किए। यहां लोकसभा चुनाव के कारण कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। चुनाव के बाद विदेश मंत्रालय ने ट्वीट का संज्ञान लिया और एंबेसी पर दबाव डाला। वापसी के टिकट के लिए रुपये नहीं थे तब घर वालों ने मदद की। तब जाकर हमारी वापसी संभव हो सकी।
ब्लैक टी और रोटी का मिलता था नाश्ता
विपिन ने बताया कि हम लोगों के घर वापसी का नाम लेने पर प्रबंधक हमसे नाराज था। गुस्से में हम लोगों को रविवार का खाना देना बंद कर दिया। हम सभी रविवार को भूखे रहते थे, या बाजार से कुछ खरीद कर खाते थे। बाकी दिन नाश्ते में ब्लैक टी के साथ रोटी खानी पड़ती थी। दोपहर और रात में दाल, चावल और रोटी मिलती थी। जैसे तैसे खा पाते थे। कभी कभी धनिया की चटनी बना कर खाते थे।