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Varanasi News: भारतीय ज्ञान की परंपरा की आत्मा है शास्त्रार्थ, मासिक शास्त्रार्थ सभा में बोले कुलपति

Thu, 16 Apr 2026 09:53 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 16 Apr 2026 09:53 AM IST
सार

कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि काशी में देवभाषा संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की परंपरा अत्यंत प्राचीन एवं गौरवशाली रही है। यहां की विद्वत् परंपरा ने न केवल भारत, बल्कि विश्व स्तर पर संस्कृत ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

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Vice-Chancellor Prof. Bihari Lal engaged in scholarly discourse at Shastrarth Sabha  of Sanskrit University
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर के वाग्देवी मंदिर मंडप में आयोजित मासिक शास्त्रार्थ सभा में शास्त्र संवाद हुआ। व्याकरण विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान प्रणाली की आत्मा है। इसके माध्यम से तर्क, प्रमाण एवं संवाद द्वारा सत्य की स्थापना होती है।

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कार्यक्रम में कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि काशी में देवभाषा संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की परंपरा अत्यंत प्राचीन एवं गौरवशाली रही है। यहां की विद्वत् परंपरा ने न केवल भारत, बल्कि विश्व स्तर पर संस्कृत ज्ञान के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान प्रणाली की आत्मा है, जिसके माध्यम से तर्क, प्रमाण एवं संवाद द्वारा सत्य की स्थापना होती है।
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वर्तमान में इस परंपरा को जीवित रखना अत्यंत आवश्यक है, जिससे नई पीढ़ी में शास्त्रीय ज्ञान के प्रति रुचि और गहन समझ विकसित हो सके। व्याकरण विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दिव्य चेतन ब्रह्मचारी ने कहा कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य परंपरागत शास्त्रार्थ परंपरा का संरक्षण और  संवर्धन है। 
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शास्त्रार्थ सभा में व्याकरण, वेदांत, न्याय, मीमांसा तथा धर्मशास्त्र जैसे विविध विषयों पर दो पक्षों के बीच तर्कपूर्ण व प्रभावशाली संवाद हुआ। समारोह में कुलपति ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। इस दौरान शिवराम दास, हरिओम, अजीत दुबे, सुदर्शन भट्टराई, संविदा कुमारी आदि मौजूद रहे।

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