संपूर्णानंद के पूर्व प्रति कुलपति का निधन, काशी में नहीं होने दी थी वाटर फिल्म की शूटिंग
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति और काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. शिवजी उपाध्याय का शनिवार को निधन हो गया। मणिकर्णिका घाट पर उनके पुत्र निस्यंद उपाध्याय ने मुखाग्नि दी। उनके निधन पर दशाश्वमेध घाट स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय में डॉ. विनोद पाठक की अध्यक्षता में शोक सभा का आयोजन किया गया।
डॉ. विनोद राव पाठक ने कहा कि हमें याद है कि प्रो. शिवजी ने काशी की संस्कृति व सभ्यता की रक्षा के लिए वाटर फिल्म को काशी में शूट नहीं होने दिया था। उस समय काशी की पूरी जनता भी उनके साथ खड़ी थी।
काशी की विद्वत परंपरा के स्तंभ प्रो. शिवजी उपाध्याय राष्ट्रपति सम्मान, विश्वभारती पुरस्कार, साहित्य शिरोमणि, महामहोपाध्याय की उपाधि से विभूषित थे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी शशींद्र मिश्र ने बताया कि पं. उपाध्याय ने शिवपुर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली।
काशी विद्वत परिषद के कार्यकारी महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि पं. उपाध्याय कई माह से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन पर काशी के विद्वत समाज में शोक की लहर है। उनके निधन पर काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल, प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष आचार्य वाचस्पति मिश्र ने शोक जताया। वहीं काशी विद्वत परिषद और विश्वविद्यालय व संस्कृत महाविद्यालयों में शोकसभा का आयोजन किया गया।
संस्कृत जगत का दैदीप्यमान नक्षत्र लुप्त हो गया। उनके जाने से जो रिक्तता आई है उस स्थान की पूर्ति बेहद कठिन है।
प्रो. राजाराम शुक्ल, कुलपति, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
संस्कृत साहित्य के साथ अंग्रेजी भाषा के अद्भुत विद्वान थे। देश के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित पं. शिवजी उपाध्याय का जीवन संस्कृत भाषा और शास्त्रों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा।
पद्मश्री प्रो. रामयत्न शुक्ल, अध्यक्ष काशी विद्वत परिषद
मिर्जापुर में हुआ जन्म, काशी रही कर्मस्थली
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति रहे पं. शिवजी उपाध्याय साहित्य के प्रकांड विद्वान थे। तीन मार्च 1943 में पं. उपाध्याय का जन्म मिर्जापुर के पंडितपुर में हुआ था। प्राच्य विद्या के क्षेत्र में अग्रणी आचार्य उपाध्याय साहित्य में स्वर्णपदक प्राप्त वेदांत, सांख्य, मीमांसा, न्याय, पुराण, तंत्र और आगम आदि विषयों के प्रकांड विद्वान थे। उन्हें संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, पाली एवं प्राकृत भाषा पर समान अधिकार प्राप्त था। उन्होंने अध्ययन के उपरांत आठ अगस्त 1971 से जून 2003 तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, उपाचार्य एवं आचार्य का पद सुशोभित किया।
महाकाव्य और ग्रंथ
पं. शिवजी उपाध्याय अशुकवि के रूप में संपूर्ण देश में ख्याति प्राप्त थे। उन्होंने श्रीविन्धेय्श्वरीसत्व:, सर्वदर्शन विमर्श:शतकत्रयम, सत्परामश, योतक, राष्ट्रगौरवम आदि दर्जनों काव्य, महाकाव्य, नाटक, सूक्तिपदों का ग्रंथ लिखा था।