वाराणसी: निर्माणाधीन होटल को तोड़ने पहुंची वीडीए की टीम, नोकझोंक और हंगामा; हाईकोर्ट का ऑर्डर देख लौटी
वाराणसी में निर्माणाधीन होटल को ध्वस्त करने पहुंची वीडीए की टीम हाईकोर्ट का आदेश देखने के बाद लौट गई। वीडीए सचिव के नेतृत्व में पहुंची टीम और मौके पर मौजूद लोगों के बीच नोकझोंक हुई। इस दौरान हंगामे की स्थिति बनी रही। हाईकोर्ट के आदेश के चलते ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो सकी।
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रथयात्रा से गुरुबाग जाने वाले मार्ग पर थिओसोफिकल सोसाइटी परिसर में दयाल ग्रुप के होटल निर्माण चल रहा है। शुक्रवार को वीडीए के सचिव वेद प्रकाश मिश्र के नेतृत्व में टीम होटल के निर्माण को ध्वस्त करने पहुंची। मौके पर नोकझोंक और हंगामे जैसी स्थिति रही भारी संख्या में पुलिस बुलडोजर को देखकर होटल बनाने वाले की तरफ से भारी विरोध किया गया। होटल के विधिक सलाहकारों ने हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखाने के बाद वीडीए की टीम लौट आई।
वीडीए सचिव ने बताया कि थियोसोफिकल सोसाइटी परिसर में होटल का नक्शा निरस्त होने के बाद ध्वस्तीकरण आदेश पारित किए हुए था। इसका अनुपालन कराने वीडीए की की टीम गई थी। होटल के विधिक सलाहकारों ने हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखाया। जिस पर कार्रवाई रुक गई है।
आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। वीडीए की टीम मौके पर पहुंची तो वहां तनावपूर्ण स्थिति बन गई। होटल निर्माण को लेकर जमीन के स्वामित्व और लीज से जुड़े विवाद भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि परिसर की जमीन 30 साल की लीज पर ली गई है।
मामले को लेकर प्रधानमंत्री से मिलेंगे सांसद
जमीन के स्वामित्व समेत अन्य विवादों के बीच होटल निर्माण की वैधता पर सवाल उठे तो वीडीए ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई की। निर्माण के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाए जाने की बात सामने आने के बाद वीडीए ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश और विभागीय अभिलेखों की जांच के आधार पर तय होगी।
चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने पूरे प्रकरण को व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर अवगत कराया था। इस प्रकरण को विधानसभा के अंदर जमानिया के विधायक ओमप्रकाश सिंह ने भी उठाया था। मूल रूप से यह जमीन उपेंद्र बसु की है जो सोसाइटी को कभी अधिकृत रूप से दान नहीं दी थी।