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Vasant Panchami: 23 घंटे 17 मिनट तक मनाएंगे वसंत पंचमी, रात 2:29 बजे से ही शुरू होगा शुभ मुहूर्त
Wed, 21 Jan 2026 06:17 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jan 2026 06:17 PM IST
सार
23 जनवरी को आधी रात 2ः29 बजे से माघ शुक्ल पंचमी तिथि का शुभारंभ हो जाएगा और फिर पूरे दिन शास्त्रीय विधि विधान के साथ मनाया जाएगा। अगले दिन यानी 24 जनवरी की आधी रात 1ः46 बजे तक वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त होगा।
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वसंत पंचमी 2026
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त 23.17 घंटे का होगा। यानी 24 घंटे में सिर्फ 43 मिनट ही वसंत पंचमी का मुहूर्त नहीं होगा, वो भी आधी रात में। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि 23 जनवरी को आधी रात 2ः29 बजे से माघ शुक्ल पंचमी तिथि का शुभारंभ हो जाएगा और फिर पूरे दिन शास्त्रीय विधि विधान के साथ मनाया जाएगा। अगले दिन यानी 24 जनवरी की आधी रात 1ः46 बजे तक वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त होगा।
वसंत के लिए कहा गया है - उदयं याति भास्कर। यानी कि तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित होती है। वही उस दिन की मान्य तिथि मानी जाती है। वसंत पंचमी पर सूर्य मकर राशि और चंद्रमा मीन राशि में स्थित होगा। ऐसे में पूर्वभाद्रपद नक्षत्र और शिव योग का संयोग बन रहा है। विद्या, बुद्धि और ज्ञान, साधना के लिए इस संयोग को विशेष फलदायी माना गया है।
सुबह से 7:56 बजे से ही शुरू हो जाएगी सरस्वती पूजा
23 जनवरी को सुबह 7ः56 बजे से दोपहर 1ः59 बजे तक श्री सरस्वती पूजन और विद्यारंभ का उत्तम मुहूर्त रहेगा। ऋतु परिवर्तन, नवचेतना सृजनशीलता और बौद्धिक जागरण का प्रतीक पर्व है। इस अवसर पर शिक्षण संस्थानों में कई धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रम किए जाएंगे। वाग्देवी को सफेद और पीला वस्त्र पहना कर, सफेद पुष्प, फल, कलम-किताब अर्पित कर पूजा करना चाहिए।
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वसंत के लिए कहा गया है - उदयं याति भास्कर। यानी कि तिथि सूर्योदय के समय उपस्थित होती है। वही उस दिन की मान्य तिथि मानी जाती है। वसंत पंचमी पर सूर्य मकर राशि और चंद्रमा मीन राशि में स्थित होगा। ऐसे में पूर्वभाद्रपद नक्षत्र और शिव योग का संयोग बन रहा है। विद्या, बुद्धि और ज्ञान, साधना के लिए इस संयोग को विशेष फलदायी माना गया है।
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सुबह से 7:56 बजे से ही शुरू हो जाएगी सरस्वती पूजा
23 जनवरी को सुबह 7ः56 बजे से दोपहर 1ः59 बजे तक श्री सरस्वती पूजन और विद्यारंभ का उत्तम मुहूर्त रहेगा। ऋतु परिवर्तन, नवचेतना सृजनशीलता और बौद्धिक जागरण का प्रतीक पर्व है। इस अवसर पर शिक्षण संस्थानों में कई धार्मिक और शैक्षणिक कार्यक्रम किए जाएंगे। वाग्देवी को सफेद और पीला वस्त्र पहना कर, सफेद पुष्प, फल, कलम-किताब अर्पित कर पूजा करना चाहिए।
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