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Vasant Panchami: पतझड़ के बाद वसंत के आगमन का संदेश दे रही है प्रकृति, बिखरने लगी है बहार

Sat, 05 Feb 2022 01:04 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 05 Feb 2022 01:04 AM IST
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Vasant Panchami: Nature is giving message of arrival of spring after autumn started disintegrating
वसंत पंचमी। - फोटो : अमर उजाला

पतझड़ के बाद वसंत के आगमन का संकेत प्रकृति के बदलते परिवेश से लगने लगा है। पेड़-पौधे नए पत्ते धारण करने लगे हैं, फू ल खिलने लगे हैं और खेतों में पीले-पीले सरसों के फूल लहराने लगे हैं। प्रकृति के नए शृंगार के साथ ही वसंत की बयार भी बहने लगी है। जाती हुई सर्दियां, बड़े होते दिन, गुनगुनाती धूप धीरे-धीरे तेज होती हुई। खेतों में नई फसल पक जाती है। सरसों, राई और गेहूं के खेत मन को लुभाने लगते हैं। वसंत का उल्लास अब जन-मन के साथ ही मौसम में भी बिखरने लगा है। वसंत हर किसी को बरबस अपनी तरफ आकर्षित करता है।

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उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने बताया कि बात अगर संगीत की हो तो राग वसंत और राग बहार भी है। दोनों राग को मिलाकर वसंत बहार राग की रचना हुई है। वसंत के साथ ही प्रकृति में भी बहार नजर आने लगती है। नवगीतकार सुरेंद्र वाजपेयी वसंत के महीने में सुंदर-सुंदर खिलते फूलों को चूमते शबनम के कतरे जिंदगी की हकीकत से जान पहचान करवाते हैं।
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खेतों में दूर-दूर तक सरसों की पीली सोने जैसी चमकती फसलें आंखों के लिए एक तंदरुस्त खुराक, भव्य नजारों को तृप्ति में बदलती हैं। लहलहाते हरे-भरे खेत, फूलों के रंगों की सुंदर झलक, आमों के ऊपर पड़ा बौर किसी मतवाली कोयल का इकरार, मनमोहनी आवाज को तरसता है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि पांच फरवरी को सूर्य के राशि परिवर्तन से वसंत ऋतु का आगमन हो जाएगा। पुराणों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी।

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वसंत पंचमी के दिन विष्णु पूजा का भी महत्व है। इस दिन ब्रह्मा जी ने सरस्वती की रचना की थी। पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने बताया कि प्रकृति फि र से नया शृंगार करती है। टेसू के दिलों में फि र से अंगारे दहक उठते हैं। कोयल की कुहू-कुहू की आवाज भंवरों के प्राणों को उद्वेलित करने लगती है। 
 
मूड बदलने वाले हार्मोन की बढ़ जाती है मात्रा
काशी विद्यापीठ के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि वसंत से होली के बीच मौसम परिवर्तन से शरीर में कई बदलाव होते हैं। इस दौरान दिन बड़े होने, सूरज की रोशनी बढ़ने, लहराती सरसों और रंग-बिरंगे फू ल दिखने से लोगों के शरीर में ऐसे हॉर्मोन की मात्रा बढ़ जाती है जो मूड में बदलाव के लिए जिम्मेदार हैं।

सेरोटोनिन की बढ़ी मात्रा से आती है खुशियां
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के डॉ. अजय ने बताया कि सर्दियों में लोग कम सक्रिय रहते हैं जिसके कारण उनके जैव रासायनिक क्रिया प्रभावित होती है। सर्दी के बाद जब वसंत का आगमन होता है तो दिन बड़े होते हैं और धूप होने से तापमान बढ़ता है। तापमान बढ़ने से लोगों की सक्रियता बढ़ने और धूप के कारण शरीर में सेरोटोनिन हार्मोन की मात्रा बढ़ने लगती है। यह हार्मोन खुशी के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। इससे हम खुद के प्रति अच्छा महसूस करते हैं।

मिलता है प्राकृतिक दर्द निवारक
मनोविज्ञानी डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने बताया कि वसंत का असर तन-मन पर पड़ता है। लोगों की सक्रियता बढ़ने से शरीर में पहले के मुकाबले एंडोर्फिन हार्मोन का स्त्राव अधिक होने लगता है। यह प्राकृतिक दर्द निवारक होता है और दर्द में सक्रिय होता है। सर्दियों में नींद और आलस के लिए जिम्मेदार रसायन मेलोटोनिन का स्राव अधिक होता है, लेकिन वसंत में धूप खिलने और रंग बिरंगे नजारे दिखने से हॉर्मोन का स्राव कम होता है।

वसंत ऋतु में कफ होता है प्रभावी 
आयुर्वेद संकाय बीएचयू के वैद्य सुशील दुबे ने बताया कि वर्षा ऋतु में वात का प्रकोप, शरद ऋतु में पित्त और वसंत ऋतु में कफ  का प्रकोप रहता है। वात के रोगों से बचने के लिए वस्ती या एनीमा, तेल का प्रयोग करना चाहिए। पित्त के प्रकोप से बचने के लिए पेट साफ रखने के लिए घी का प्रयोग करना चाहिए। जबकि वसंत ऋतु में होने वाले कफ के प्रकोप से बचाव के लिए अगर 15 दिन में उल्टी आ जाए तो ठीक होता है। सेंधा नमक, शहद और गुनगुने पानी का प्रयोग करें तो कफ से मुक्ति मिल जाएगी। मोटापा, मधुमेह, सांस रोगी, घुटने का रोग होने की संभावना भी इसी मौसम में रहती है। इस समय शरीर में भारीपन, मन में मिचली और खांसी में बढ़ोतरी हो जाती है। 

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