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वरुणा पर कब्जाः कारोबारी के लिए छह विभागों ने मिलकर उड़ाई नियम-निर्देशों की धज्जियां

Fri, 02 Jun 2017 01:04 PM IST
amarujala.com- Written by: जय नारायण सिंह यादव
amarujala.com- Written by: जय नारायण सिंह यादव Updated Fri, 02 Jun 2017 01:04 PM IST
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varuna encroachment due to six department just for businessman
राजस्व विभाग की मिलीभगत से होटल कारोबारी ने राजस्व रिकॉर्ड में कराई छेड़छाड़ - फोटो : अमर उजाला
वरुणा का गला घोंटने वाले होटल कारोबारी और अधिकारियों के गठजोड़ ने नियम-निर्देशों की ऐसी धज्जियां उड़ाई हैं कि उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। अस्तित्व के लिए जूझती वरुणा की तलहटी को पाटकर कब्जा जमाने वाले कारोबारी के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों ने सारी हदें पार कर दीं।
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गाटा संख्या में हेरफेर करते हुए कारोबारी के पक्ष में राजस्व रिकॉर्ड ही बदल डाला। आश्चर्य यह कि यह अंधेरगर्दी वर्ष 2010 में डूब क्षेत्र की जमीन कब्जाने के आरोप में कारोबारी हीरालाल जायसवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद की गई। बदले गए राजस्व रिकॉर्ड को ही साक्ष्य बनाकर कारोबारी ने तब जमानत ले ली थी। 
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2010 में तत्कालीन डीएम रवींद्र के निर्देश पर नगर निगम के एक अधिकारी जसवंत सिंह ने कारोबारी हीरालाल के खिलाफ कैंट थाने में यह मुकदमा दर्ज कराया था।

तब नगर निगम को भी इसकी जानकारी दी गई थी लेकिन जिम्मेदार सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे रहे और जमीन कारोबारी के नाम विनियमित हो गई।
सिर्फ राजस्व विभाग और नगर निगम में ही नहीं, प्रशासन, तहसील, वीडीए और सिंचाई विभाग तक कारोबारी-अधिकारी गठजोड़ की गहरी पैठ के चलते हर कदम पर नियम-निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।
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सूत्रों का दावा है कि शुरुआती दौर से ही नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों को मामले की जानकारी थी लेकिन किसी ने इस पर कदम नहीं बढ़ाया। अब जब मामले की परत-दर-परत खुलने लगी है तो सब अपने को इससे अनभिज्ञ बताने में जुट गए हैं। 

मॉनीटरिंग की फौज करती रह गई मौज

varuna encroachment due to six department just for businessman
वरुणा के डूब क्षेत्र में में बन गई बांउड्री - फोटो : अमर उजाला
भीमनगर में वरुणा किनारे सरकारी जमीन पर यूं ही कब्जा नहीं हो गया। मलाई काट रहे राजस्व विभाग और नगर निगम के अफसरों की जानकारी में पूरा मामला था। इसके बाद भी जमीन के विनियमन से लेकर बाउंड्री निर्माण और मिट्टी पाटने तक का खेल खुलेआम हुआ और किसी तरह की रोकटोक नहीं हुई।

अब जब मामला शासन स्तर तक पहुंच गया है तब सात साल तक सोते रहे अधिकारी, कर्मचारी अपनी कुर्सी बचाने में जुट गए हैं।  बता दें कि नगर निगम की जमीनों की निगरानी के लिए महापौर और नगर आयुक्त की मानीटरिंग में राजस्व प्रभारी, तहसीलदार के साथ कर्मचारियों की फौज तैनात है।

वरुणा की तलहटी की जमीन कब्जाने का खेल सात साल पहले जब शुरू हुआ तब से अब तक दो महापौर और चार नगर आयुक्त तैनात हुए लेकिन सभी इस ओर नजर उठाने से बचते रहे। जबकि, पूरा मामला नगर निगम और राजस्व विभाग के अधिकारियों की जानकारी में तब ही आ गया था जब जमीन कब्जाने की शिकायत पर 2010 में तत्कालीन डीएम रवींद्र के निर्देश पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

तत्कालीन डीएम के तबादले के बाद संबंधित अधिकारी ढीले पड़ गए। सूत्रों की मानें तो राजस्व के साथ ही जमीने कब्जे के पीछे बड़ी भूमिका नगर निगम की रही। मामला शासन तक पहुंचने के बाद अब नगर निगम के अफसरों से लेेकर कर्मचारियों तक की नींद उड़ी हुई है।

जानकारों का कहना है कि इसकी जांच पड़ताल हुई तो नगर निगम के  कई अफसरों और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
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