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दो साल में हो जाएगा पुरानी काशी का कायाकल्प, अस्सी से राजघाट तक सब कुछ होगा आधुनिक
जयनारायण सिंह यादव,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 08 May 2017 02:35 PM IST
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109.83 करोड़ रुपये से चार स्थानों पर बनेगी मल्टी लेवल पार्किंग
- फोटो : अमर उजाला
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पुरातन नगरी काशी दो साल बाद नए कलेवर में दिखेगी। संकरी गलियां, गलियों में घूमते नंदी, गंगाघाट की ऐतहासिकता और पौराणिक महत्व को बरकरार रखते हुए उसे नया रंग-रूप दिया जाएगा। जर्जर तार हटेंगे तो खराब हो रहे पत्थर भी बदले जाएंगे।
प्राचीनता के साथ आधुनिकता के अनूठे समन्वय का यह कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत होगा। योजना कई कदम आगे बढ़ चुकी है और पांच मई को लखनऊ में इस पर अंतिम मुहर लगेगी।
20 सितंबर 2016 को स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के बाद विकास के लिए स्पेशल परपज व्हेकिल (एसपीजी) के तहत वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड (वीएससीएल) कंपनी के रूप में पंजीकृत हो चुकी है।
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आईटी क्षेत्र की कंपनी ग्रांट थारटन इंडिया लिमिटेड, लखनऊ की कंपनी रुद्राभिषेक इंटरप्राइजेज कंपनी लिमिटेड (आरईसीएल) को संसाधन जुटाने और नोएडा की कंपनी एएनबी को धरोहर संरक्षण के लिए काम करने के लिए चुना गया है। वीएससीएल कंपनी के नामित चेयरमैन मंडलायुक्त और नगर आयुक्त को सीईओ बनाया गया है।
अस्सी से राजघाट तक करीब 1300 एकड़ की आबादी वाले क्षेत्र में काशी की पहचान एवं प्राचीनता को बनाए रखने के साथ ही उसे आधुनिकता से भी लैस किया जाएगा। इस क्षेत्र के घाटों से लेकर गलियों, सड़कों में यातायात प्रबंधन, सीवेज, बिजली, पेयजल, स्कूल, अस्पताल और सफाई व्यवस्था-कचरा प्रबंधन के 21 बिंदुओं पर मॉडल के रूप में विकास किया जाएगा। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
यही नहीं, टाउनहाल, तांगा स्टैंड गोदौलिया, मछोदरी स्कूल और कंपनी गार्डेन में पार्किंग बनेगी। इसके अलावा आवासीय कम आफिस मल्टी स्टोरी पार्किंग में जूता मार्केट लहुराबीर, सेनपुरा पशु चिकित्सालय, नगर निगम के पास पार्किग की व्यवस्था की जाएगी।
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प्राचीनता के साथ आधुनिकता के अनूठे समन्वय का यह कार्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत होगा। योजना कई कदम आगे बढ़ चुकी है और पांच मई को लखनऊ में इस पर अंतिम मुहर लगेगी।
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20 सितंबर 2016 को स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल होने के बाद विकास के लिए स्पेशल परपज व्हेकिल (एसपीजी) के तहत वाराणसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड (वीएससीएल) कंपनी के रूप में पंजीकृत हो चुकी है।
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आईटी क्षेत्र की कंपनी ग्रांट थारटन इंडिया लिमिटेड, लखनऊ की कंपनी रुद्राभिषेक इंटरप्राइजेज कंपनी लिमिटेड (आरईसीएल) को संसाधन जुटाने और नोएडा की कंपनी एएनबी को धरोहर संरक्षण के लिए काम करने के लिए चुना गया है। वीएससीएल कंपनी के नामित चेयरमैन मंडलायुक्त और नगर आयुक्त को सीईओ बनाया गया है।
अस्सी से राजघाट तक करीब 1300 एकड़ की आबादी वाले क्षेत्र में काशी की पहचान एवं प्राचीनता को बनाए रखने के साथ ही उसे आधुनिकता से भी लैस किया जाएगा। इस क्षेत्र के घाटों से लेकर गलियों, सड़कों में यातायात प्रबंधन, सीवेज, बिजली, पेयजल, स्कूल, अस्पताल और सफाई व्यवस्था-कचरा प्रबंधन के 21 बिंदुओं पर मॉडल के रूप में विकास किया जाएगा। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
यही नहीं, टाउनहाल, तांगा स्टैंड गोदौलिया, मछोदरी स्कूल और कंपनी गार्डेन में पार्किंग बनेगी। इसके अलावा आवासीय कम आफिस मल्टी स्टोरी पार्किंग में जूता मार्केट लहुराबीर, सेनपुरा पशु चिकित्सालय, नगर निगम के पास पार्किग की व्यवस्था की जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन से सुधरी सफाई व्यवस्था
काशी
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर की सफाई व्यवस्था सुधरी है। जायका योजना से शहर में 153 में से 95 आधुनिक टायलेट का निर्माण हो चुका है। स्वच्छता अभियान में शहर के विभिन्न इलाकों में 126 यूरिनल बनाए जा चुके हैं।
वहीं केंद्र और प्रदेश सरकार की मदद से खुले में शौच रोकने के लिए 8547 गरीब शहरियों के लिए निजी टायलेट बनाए जाने हैं। तीन हजार से अधिक का निर्माण हो चुका है।
शहर के 90 वार्डों में सफाई व्यवस्था का जिम्मा नगर निगम के साथ तीन निजी कंपनियों को दिया गया है। इसमें आईएलएफएस पक्का महाल के 14 वार्डों में तीन साल तक सफाई करेगी। इन वार्डों में 27 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं कियाना संस्था को 30 वार्डों की जिम्मेदारी दी गई है।
उसे 15 लाख रुपये एक साल के लिए और 25 वार्ड के लिए इकोपाल को जिम्मेदारी दी गई है। इसे 55 लाख रुपये दिया जाएगा। बाकी 21 वार्डों में नगर निगम स्वयं सफाई का जिम्मा संभाले हुए है।