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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Varanasi Varuna River water level rose by 17 centimeters and that of Ganga River by 0.5 centimeters

काशी में नदियों का बढ़ा जलस्तर: वरुणा का 17 और गंगा का 0.5 सेंटीमीटर बढ़ा पानी, राहत-बचाव दलों ने परखी तैयारी

Sat, 25 Jul 2026 03:49 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Sat, 25 Jul 2026 03:49 PM IST
सार

Varanasi News: काशी में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सावन और गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस, 36वीं वाहिनी पीएसी और एनडीआरएफ की संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। 

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Varanasi Varuna River water level rose by 17 centimeters and that of Ganga River by 0.5 centimeters
दशाश्वमेध घाट पर एनडीआरएफ की मॉकड्रिल में पलटी नाव से लोगों को बचाने का प्रयास करते जवान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी में गंगा और वरुणा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। शुक्रवार को वरुणा का जलस्तर 17 सेंटीमीटर और गंगा का जलस्तर 0.5 सेमी बढ़ा। इसके बाद वरुणा का जलस्तर 68.19 मीटर और गंगा का 61.07 मीटर हो गया। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए शुक्रवार को दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस, पीएसी और एनडीआरएफ ने संयुक्त मॉक ड्रिल कर बाढ़ एवं जल दुर्घटनाओं से निपटने का अभ्यास किया।

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सावन और गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए शुक्रवार को दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस, 36वीं वाहिनी पीएसी और एनडीआरएफ की संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इसका उद्देश्य बाढ़, जल दुर्घटनाओं और डूबने की घटनाओं के दौरान यात्रियों, श्रद्धालुओं, नाविकों एवं आम लोगों को सुरक्षित बचाने की तैयारियों का आकलन करना और जवानों को प्रशिक्षित करना था। मॉक ड्रिल में 36वीं वाहिनी पीएसी के कमांडेंट डॉ. अनिल कुमार पांडेय मुख्य अतिथि रहे।
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कमांडेंट डॉ. अनिल कुमार पांडेय ने बताया कि मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बाढ़ या जल दुर्घटना की स्थिति में बचाव दल स्वयं सुरक्षित रहते हुए यात्रियों, श्रद्धालुओं, नाविकों और डूब रहे लोगों का त्वरित एवं सुरक्षित रेस्क्यू कर सकें। 
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उन्होंने कहा कि बीते चार वर्षों में पीएसी ने कई सफल राहत एवं बचाव अभियान संचालित किए हैं और ऐसे अभ्यास जवानों की दक्षता को और बेहतर बनाते हैं। मॉक ड्रिल के दौरान जवानों को डूबते व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने, बाढ़ में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने, लाइफ सेविंग उपकरणों के प्रभावी उपयोग, सीपीआर देने की सही विधि की जानकारी दी गई।

सावन और मानसून के दौरान गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस प्रकार की मॉक ड्रिल बेहद महत्वपूर्ण है। इससे जल पुलिस, पीएसी और एनडीआरएफ के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। -अतुल अंजान त्रिपाठी, एसीपी, दशाश्वमेध

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