सूरज के साथ कदमताल करने लगी सूर्य घड़ी, 20 साल बाद बताया सही समय
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बनारस के धरोहर में शामिल मकबूल आलम रोड स्थित सूर्य घड़ी (सन 1784 में बनकर तैयार) अर्से बाद फिर से समय बताने लगी है। इतिहास बनने के कगार पर पहुंच चुकी सूर्य घड़ी को पुनर्जीवित करने का श्रेय विरासत संरक्षण के लिए समर्पित संस्था इंटेक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज) को जाता है।
संस्था के कुछ महीने के प्रयास के बाद सूर्य घड़ी फिर से सूरज के साथ कदमताल करने लगी है। शुक्रवार को मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण ने इसका लोकार्पण किया। इंटेक वाराणसी चैप्टर के संयोजक अशोक कपूर ने बताया कि इंटेक के प्रतिनिधिमंडल गत अक्तूबर में मंडलायुक्त से मिला था।
काशी की पांच महत्वपूर्ण धरोहरों के संरक्षण की कार्ययोजना बताई थी। इसमें सूर्य घड़ी का संरक्षण प्रमुख था। अब गोलागली स्थित पंचकोशी मंदिर, विश्वनाथ मंदिर से एनामिल पेंट छुड़ाने के लिए संस्था प्रयास करेगी।
मंडलायुक्त ने कहा कि काशी के धरोहर संरक्षण और शहर में विकास कार्यों के लिए संस्था का आह्वान किया। वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित खरे ने संस्था के कार्य में सहयोग की बात कही। अपर आयकर आयुक्त अभय ठाकुर ने कहा कि सूर्य घड़ी के बगल स्थित अविकसित उद्यान को हेरिटेज गार्डन बनाने का कार्य इंटेक को सौंपा गया है।
उन्होंने इसमें आयकर विभाग से हर संभव मदद दिलाने की बात कही। मंडलायुक्त ने हृदय योजनांतर्गत चिह्नित स्थलों के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण के दौरान हेरिटेज स्थलों के मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन न करने का निर्देश दिया। वीडीए उपाध्यक्ष को निर्देशित किया कि कार्य स्थल पर हेरिटेज स्थलों में कोई परिवर्तन न हो।
इस मौके पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त एवं इंटेक वाराणसी चैप्टर के सलाहकार डॉ. ओपी केजरीवाल, अशोक कपूर उमेश पाठक, अरविंद कुमार, रंजन द्विवेदी, अशोक गुप्ता, पद्मश्री एस. सुपाकर, आरसी जैन, मुदिता अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।