{"_id":"5fd7bc668ebc3e3c4d57a5a6","slug":"varanasi-somvati-amavasya-news-varanasi-news-vns563452747","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोमवती अमावस्या पर गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, पीपल में बांधी श्रद्धा की डोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोमवती अमावस्या पर गंगा में लगाई आस्था की डुबकी, पीपल में बांधी श्रद्धा की डोर
विज्ञापन
सोमवती अमावस्या पर पंचग्रही योग में आस्थावानों ने स्नान, ध्यान और तर्पण का विधान पूर्ण किया। श्रद्धालुओं ने गंगा के तट पर पुण्य की डुबकी लगाई तो महिलाओं ने पीपल की पूजा करके श्रद्धा की डोर बांधी। कोरोना संक्रमण के कारण भीड़भाड़ कम रही। पिशाच मोचन और गंगा के तट पर पितरों के निमित्त तर्पण व पिंडदान के लिए भी आसपास के जिले और प्रदेशों से श्रद्धालु पहुंचे।
सोमवार को श्रद्धालुओं ने सूर्योदय के साथ ही सोमवती अमावस्या का स्नान आरंभ कर दिया। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, मणिकर्णिका, सिंधिया, भैंसासुर और अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। स्नान के बाद पूजा-अर्चना और दान पुण्य की परंपरा भी निभाई गई। कोरोना संक्रमण के कारण घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद कम रही।
वहीं शहर के कई इलाकों में विवाहित महिलाओं ने पतियों की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत का किया। पीपल के वृक्ष के नीचे महिलाओं ने विधि-विधान से सोमवती अमावस्या की पूजा की और धागा लपेटकर परिक्रमा पूर्ण की। गंगा के तट से लेकर पिशाच मोचन कुंड पर पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक लगी रही। आसपास के जिलों के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश से भी आए श्रद्धालुओं ने पिशाच मोचन कुंड पर पितरों की प्रसन्नता के लिए तर्पण किया।
विज्ञापन
लगा ग्रहण, सूतक का असर नहीं
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण सोमवार की शाम को शुरू हुआ जो देर रात 12 बजे तक रहा। भारत में दृश्यमान नहीं होने के कारण सूतक नहीं लगा। ग्रहण अफ्रीका के दक्षिणी भाग, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर और अंटार्कटिका क्षेत्र में प्रभावी रहा।
विज्ञापन
सोमवार को श्रद्धालुओं ने सूर्योदय के साथ ही सोमवती अमावस्या का स्नान आरंभ कर दिया। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, मणिकर्णिका, सिंधिया, भैंसासुर और अस्सी घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। स्नान के बाद पूजा-अर्चना और दान पुण्य की परंपरा भी निभाई गई। कोरोना संक्रमण के कारण घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बेहद कम रही।
विज्ञापन
वहीं शहर के कई इलाकों में विवाहित महिलाओं ने पतियों की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत का किया। पीपल के वृक्ष के नीचे महिलाओं ने विधि-विधान से सोमवती अमावस्या की पूजा की और धागा लपेटकर परिक्रमा पूर्ण की। गंगा के तट से लेकर पिशाच मोचन कुंड पर पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ देर शाम तक लगी रही। आसपास के जिलों के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश से भी आए श्रद्धालुओं ने पिशाच मोचन कुंड पर पितरों की प्रसन्नता के लिए तर्पण किया।
विज्ञापन
लगा ग्रहण, सूतक का असर नहीं
साल का आखिरी सूर्य ग्रहण सोमवार की शाम को शुरू हुआ जो देर रात 12 बजे तक रहा। भारत में दृश्यमान नहीं होने के कारण सूतक नहीं लगा। ग्रहण अफ्रीका के दक्षिणी भाग, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर और अंटार्कटिका क्षेत्र में प्रभावी रहा।