Lok Sabha Election: पटेल वोटरों को साधने के लिए सपा ने सुरेंद्र पर लगाया दांव, 'PDA' फार्मूले पर लड़ेंगे चुनाव
समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी की है। सूची में वाराणसी के साथ कैराना, बदायूं, बरेली, अमरोहा, कन्नौज, आजमगढ़ के प्रभारियों का नाम शामिल हैं। वाराणसी लोकसभा सीट से सुरेंद्र सिंह पटेल को प्रत्याशी घोषित किया गया है।
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सपा ने पटेल वोटरों में सेंधमारी के लिए पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल को वाराणसी लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 19.39 लाख मतदाता हैं। इनमें तीन लाख मतदाता पटेल विरादरी के शामिल हैं। सुरेंद्र दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से पांच विधानसभा सीटें जुड़ी हैं। रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा सीट पटेल बहुल मानी जाती है। सेवापुरी से भाजपा विधायक नीलरतन पटेल और रोहनिया से अपना दल एस के विधायक सुनील पटेल हैं। चुनावी रणनीतिकारों के मुताबिक, सुरेंद्र पटेल के लड़ने से पटेल वोट बैंक में बंटवारा संभव है। सेवापुरी और रोहनिया में भी वोटों के विखराव की उम्मीद है।
सुरेंद्र 2002 में गंगापुर विधानसभा (वर्तमान में सेवापुरी) से विधायक चुने गए थे। कुछ दिनों बाद बसपा में चले गए। 2007 में दोबारा गंगापुर से सपा के विधायक बने। 2012 में सेवापुरी से ही सपा के विधायक चुने गए और सपा सरकार में पीडब्ल्यूडी राज्यमंत्री बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा ने पहली बार सुरेंद्र पटेल को मिर्जापुर से प्रत्याशी बनाया, लेकिन अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल से चुनाव हार गए।
... तो लगती थी चाय की दुकान
लोकसभा चुनाव में जीत के बाद अनुप्रिया पटेल ने रोहनिया विधानसभा की सीट छोड़ दी। यहां उपचुनाव हुआ तो सुरेंद्र पटेल के भाई महेंद्र पटेल विधायक बन गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में सुरेंद्र को सपा से टिकट मिलने की चर्चा थी, लेकिन नामांकन के अंतिम दिन सपा ने पहले से घोषित प्रत्याशी शालिनी यादव की जगह बीएसफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर नामांकन करवा दिया था। बाद में सपा शालिनी यादव को अपना सिंबल दिया और वह दूसरे नंबर पर रहीं। अब शालिनी यादव भाजपा में हैं। सपा नेताओं का कहना है कि सुरेंद्र पटेल जमीनी नेता हैं। एक जमाने में सुरेंद्र पटेल की राजातालाब में चकबंदी कार्यालय के बाहर चाय की दुकान लगती थी।