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Varanasi : रुद्राक्ष में मनाई गई राम दीपावली, 2000 दर्शकों ने उतारी आरती; 3 घंटे में रामायण की अनूठी प्रस्तुति
Mon, 05 Feb 2024 01:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 05 Feb 2024 01:31 AM IST
सार
अर्थात श्री रामचंद्र जी का राज्याभिषेक होने पर तीनों लोक हर्षित हो गए। उनके सारे शोक दूर हो गए। कोई किसी से बैर नहीं करता। श्री रामचंद्रजी के प्रताप से सभी भेदभाव मिट गए। प्रभु श्रीराम का ये प्रसंग रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में रविवार की शाम जीवंत हुआ।
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सांकेतिक तस्वीर...
विस्तार
राम राज बैठें त्रैलोका, हरषित भए गए सब सोका। बयरु न कर काहू सन कोई, राम प्रताप बिषमता खोई... अर्थात श्री रामचंद्र जी का राज्याभिषेक होने पर तीनों लोक हर्षित हो गए। उनके सारे शोक दूर हो गए। कोई किसी से बैर नहीं करता। श्री रामचंद्रजी के प्रताप से सभी भेदभाव मिट गए। प्रभु श्रीराम का ये प्रसंग रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में रविवार की शाम जीवंत हुआ।
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सनबीम एकेडमी समूह की सामनेघाट शाखा के 25 साल पूरे होने पर आयोजित दो दिवसीय रामायण के तहत जय श्रीराम का भावपूर्ण मंचन हुआ। रावण पर विजय के बाद राम के राज्याभिषेक के दृश्य को हर किसी ने अपने मन में बसाया। पहली बार एक छत के नीचे एक मंच पर एक हजार बच्चों ने यहां श्रीराम का नाट्य मंचन किया। इस मंचन को लिम्का बुक आफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी है।
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सभागार में मौजूद 1500 दर्शक और 500 से अधिक प्रतिभागियों ने राम दरबार की आरती उतारी। हर हाथ में इलेक्ट्रानिक दीये से भगवान के स्वरूप की आरती उतारकर हर किसी ने खुद को राम के चरणों में श्रद्धा अर्पित की। इसके बाद भगवान राम, सीता और हनुमान ने दर्शकों के बीच पहुंचकर सभी को दर्शन दिए। भगवान राम और सीता के वेश में कलाकारों का भाव ऐसा था मानों साक्षात भगवान भक्तों के बीच पहुंचे हों।
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तीन घंटे की मनमोहक रामायण की प्रस्तुति में एक हजार कलाकारों ने अपने अभिनय से श्रोताओं को बांधे रखा। 12 सौ की क्षमता वाले रुद्राक्ष में 15 सौ दर्शक हो गए। कोई जमीन पर तो कोई अलग से कुर्सी लगाकर बैठा हुआ था। इससे पहले मुख्य अतिथि रामायण के राम अरुण गोविल, डॉ. राजेश्वर आचार्य, विद्यालय समूह के निदेशक जगदीप मधोक ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालन संजीव झा, विवेक पांडेय, प्रीतेश आचार्य एवं अंकिता खत्री ने किया।
रामविवाह के बाद जब भगवान राम अपने चारों भाइयों के साथ अयोध्या के लिए निकले तो पूरे सभागार की परिक्रमा के दृश्य ने दर्शकों को भी मंचन से जुड़ने का अवसर दिया। इसके बाद होली खेलें रघुवीरा की धुन पर जब राम और सीता ने होली खेलनी शुरू की तो हाल में बैठे हुए दर्शक भी इस फागुनी अहसास में सराबाेर होने से खुद को रोक नहीं सके। कैकेयी और मंथरा के संवाद ने क्रोध का भाव जगाया तो रामवनगमन के दौरान दर्शकों की पलकों की कोर भी नम हो गई। भरत के अयोध्या आगमन, राम से मिलन और खड़ाऊं लेकर लौटने के प्रसंग ने त्याग और प्रेम के दर्शन भी कराए।
इनकी रही खास भूमिका निर्देशन रंगकर्मी डॉ. परितोष भट्टाचार्य, पटकथा डॉ. राजेंद्र उपाध्याय, वायस डायरेक्शन राजेश्वर त्रिपाठी और लाइट डायरेक्शन राघव पी मिश्रा का रहा। नाट्य प्रस्तुति के सूत्रधार को अभिनेता मुकेश खन्ना ने अपनी आवाज दी थी।
सोशल मीडिया पर एक लाख से अधिक लोग जुड़े
विद्यालय के प्रशासक डॉ. निशांत सिंह ने बताया कि इस आयोजन को सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किया गया और इसमें एक लाख से अधिक दर्शक ऑनलाइन जुड़े थे। अत्यधिक भीड़ होने के कारण जो दर्शक सभागार में नहीं पहुंच सके उनके लिए नगर निगम पार्क के पास विशाल स्क्रीन लगाया गया था। प्रधानाचार्य डॉक्टर केके पंडा ने बताया कि विद्यालयों के वार्षिक समारोहों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक साथ किसी एक प्रस्तुति में 1000 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया है। इसलिए विद्यालय प्रबंधन ने इसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल कराने के लिए भी भेजा है।
ड्योढ़ी का दीप घर और मन के दीप हैं राम : अरुण गोविल
अरुण गोविल ने कहा कि ड्योढ़ी के दीप से पूरा घर रोशन होता है। ठीक ऐसे ही अधरों पर श्रीराम नाम को धारण कर लें तो पूरा जीवन ही संवर जाएगा। राम ही रामायण हैं और रामायण ही राम हैं। रामायण से जीवन में भाव आता है। इससे रिश्ते मजबूत करें। इससे समाज और देश दोनों में शांति स्थापित होगी।
रविवार को श्रीराम नाटक का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि कॉलेजों व स्कूलों को चाहिए कि वे अपने कार्यक्रमों में रामायण को भी शामिल करें। इससे बच्चों में उत्कृष्ट संस्कार के साथ ही व्यक्तित्व में भी निखार आएगा। कहा कि शिक्षा से जिंदगी में लड़ने की ताकत आती है। मगर व्यक्तित्व का विकास रामायण जैसे ग्रंथों के संदेशों से आता है। माता-पिता, पुत्र, भाई, शत्रु कैसा होना चाहिए, ये रामायण हमें बताती है। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की इच्छा पर उन्होंने रामायण में श्रीराम और रावण के बीच के संवाद को सुनाकर प्रभावित किया। जय श्रीराम नाटक की पटकथा लिखने वाले डॉ. राजेंद्र उपाध्याय ने कहा कि प्रभु श्रीराम इतिहास, आस्था, संस्कृति और भक्ति हैं। नाटक के निर्देशक डॉ. परितोष भट्टाचार्य ने कहा कि रामायण में भगवान प्रभु श्रीराम के संघर्ष के साथ कर्मयोगी और मानव बनने तक की गाथा है।