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बनारस में अपराधी बेखौफ मचाते रहे तांडव मगर सोती रही यूपी पुलिस

Thu, 19 Oct 2017 02:06 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Thu, 19 Oct 2017 02:06 PM IST
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varanasi police is trouble after back to back crime in city
UP Police
वाराणसी के जगतगंज इलाके से दबोचे गए शातिर अपराधी गुड्डू मामा और आबिद सिद्दीकी ने नशे में धुत होकर सोमवार की रात आधा घंटे तक मिंट हाउस कॉलोनी में बेखौफ तांडव मचाया। थोड़े-थोड़े अंतराल पर तीन बार में फायरिंग की लेकिन पुलिस सूचना दिए जाने के बावजूद मौके पर नहीं पहुंची।
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आधा घंटे देरी से जब पुलिस पहुंची तब तक बदमाश फरार हो गए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर पहुंची होती तो सपा नेता के कर्मचारी के भाई श्रवण की जान बच जाती और दोनों बदमाश भी मौके पर ही दबोच लिए जाते। कैंट पुलिस की लचर कार्यशैली सवालों के घेरे में है। 
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सपा नेता विजय जायसवाल के घर बदमाश गुड्डू और आबिद आधे घंटे के अंतराल में तीन बार आए। तीनों पर फायरिंग की और सरेआम गालियां दीं। विजय के मुताबिक पहली बार फायरिंग के बाद ही उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी थी लेकिन जब पुलिस नहीं आई तो वे भी नीचे नहीं उतरे। जबकि, बदमाश आसपास ही छिपकर उनके नीचे उतरने की ताक में थे। 
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मिंट हाउस क्षेत्र शहर का पॉश इलाका है और ऐसी जगह आधी रात बाद गोली चलने की सूचना के बावजूद पुलिस का समय से न पहुंचना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बदमाशों की मारपीट में घायल अखिलेश ने बताया कि उसका भाई श्रवण 11 अक्तूबर को उसके पास आया था।

तीन भाइयों में सबसे छोटा श्रवण आईटीआई की पढ़ाई पूरी कर कामकाज की तलाश में था। उधर, पोस्टमार्टम के बाद श्रवण का शव लेकर परिवारीजन घर लौट गए। अखिलेश ने कहा कि यदि समय से उसका भाई अस्पताल पहुंच जाता तो शायद बच जाता।

...तो क्या शहर में ठहरा था रईस बनारसी

varanasi police is trouble after back to back crime in city
यूपी100 - फोटो : amar ujala
गुड्डू मामा को सोमवार की रात जगतगंज में दबोचने के बाद पुलिस उसे पहचान नहीं पाई। रात तीन बजे के लगभग इंस्पेक्टर चेतगंज ने जब फोटो मिलान कराना शुरू किया तो गिरफ्त में आए एक बदमाश की शिनाख्त गुड्डू मामा के तौर पर हुई। इसके बाद कड़ाई से पूछताछ हुई तो दूसरे की शिनाख्त आबिद के तौर पर हुई। मामला पुष्ट हुआ तो आईजी रेंज दीपक रतन, एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज, एसपी सिटी और अन्य अधिकारी चेतगंज थाने पहुंचे।


गुड्डू मामा और आबिद वारदात के बाद जगतगंज की ओर से लहुराबीर जा रहे थे। दोनोें ने पुलिस को बताया कि वो बिहार के मोहनिया से यहां आए थे। पुलिस का मानना है कि हो न हो रईस बनारसी भी शहर में जरूर रहा होगा। गुड्डू की गिरफ्तारी की जानकारी होते ही वह भाग निकला होगा।

वहीं, गुड्डू ने बताया कि रईस दशाश्वमेध क्षेत्र के देवनाथपुरा स्थित अपने ननिहाल क्षेत्र में और लोहता के साथ ही मोहनिया, मिर्जापुर के छानबे क्षेत्र, इलाहाबाद और कानपुर में फरारी के बाद से छिप कर रह रहा है।

नगर निगम के पार्षदों पर पूर्व में भी हमले हुए हैं। तीन नवंबर 2015 की रात रामापुरा के पार्षद शिव सेठ की हत्या भेलूपुर थाना के तुलसीपुर में की गई थी। उससे पहले पार्षद बंशी यादव, मंगल प्रजापति, बबलू लंबू, सुरेश गुप्ता, मंटू यादव और विजय वर्मा की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। वहीं, पार्षद बाबू यादव को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया था। 
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