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गोमती रिवर फ्रंट की तरह वरुणा कॉरिडोर की भी सीबीआई जांच की मांग तेज

Tue, 20 Jun 2017 04:43 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 20 Jun 2017 04:43 PM IST
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varanasi people demand for CBI enquiry of varuna corridor
वरुणा काॅरिडोर पर पसरा सन्नाटा।
लखनऊ में गोमती रिवर फ्रंट की तरह वाराणसी के वरुणा कॉरिडोर की भी सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। नदी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठन इसके लिए लामबंद होने लगे हैं।
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उनका कहना है कि रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के नाम पर बनाई गई करोड़ों की वरुणा कॉरिडोर योजना में कई बुनियादी खामियां हैं। इसके अलावा जिस तरह मनमाने तरीके से ड्रेजिंग और निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, उसकी छानबीन होनी चाहिए। 
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संगठनों का कहना है कि नदी संरक्षण और सीवर गिरने से रोकने की कार्ययोजना को अमल में लाए बिना आनन-फानन में कॉरिडोर के नाम पर करोड़ों रुपये खपा दिए गए। तत्कालीन सरकार और योजना से जुड़े विभागों के जिम्मेदारों ने रकम खपाने के लिए आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई।
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अब तक 40 फीसदी ही काम हो पाया है तो निकाली गई 70 फीसदी रकम कहां गई, इन सभी बिंदुओं की छानबीन के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। सीबीआई जांच के मसले पर जल्द ही नदी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित करने की तैयारी है। 

बता दें कि 201 करोड़ रुपये की वरुणा कॉरिडोर योजना में 125 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। बाकी बचे रुपये की डिमांड शासन से की गई है। अब तक केवल मॉडल कार्य के नाम पर शास्त्री घाट के आसपास विकास किया गया है। 

50 फीसदी से अधिक डूब क्षेत्र पर कब्ज

varanasi people demand for CBI enquiry of varuna corridor
डूब क्षेत्र का तकरीबन पचास फीसदी से अधिक हिस्सा अवैध निर्माणों की भेंट चढ़ चुका - फोटो : अमर उजाला

कैंट से आदिकेशव घाट यानी सराय मोहना तक तकरीबन 10 किमी लंबा वरुणा शहरी इलाके में प्रवाहित होती है। इस दायरे में नदी के दोनों तरफ निर्धारित 50-50 मीटर के डूब क्षेत्र का तकरीबन पचास फीसदी से अधिक हिस्सा अवैध निर्माणों की भेंट चढ़ चुका है।

नदी की तलहटी तक भवन और मल्टीस्टोरी बिल्डिंगें बन गई हैं। इसके लिए जिला प्रशासन, वीडीए, राजस्व विभाग, नगर निगम से लेकर सिंचाई विभाग तक जिम्मेदार हैं। डूब क्षेत्र में कोई भी निर्माण वैध नहीं हो सकता, बावजूद इसके इन विभागों ने इन्हें वैध करने में कसर नहीं छोड़ी।

वरुणा कॉरिडोर की योजना के लिए सर्वे और सीमांकन के दौरान डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों से नदी के प्राकृत स्वरूप पर संकट की बात सामने आई तो अवैध निर्माणों को नोटिस थमाया गया लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई। 
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