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बांस-बल्ली के सहारे टिकी हैं पक्के महाल की दीवारें, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 27 Jun 2017 02:14 AM IST
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पांच साल पहले चिह्नित हुए भवनों पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला
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मानसून अपनी दस्तक दे चुका है। वहीं नगर निगम प्रशासन ने शहर में जर्जर भवनों के खिलाफ अब तक कोई अभियान नहीं चलाया है और न ही कोई कार्रवाई की गई। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बारिश में बड़ा हादसा हो सकता है। बांस-बल्ली के सहारे दीवारें टिकी हुई हैं।
नगर निगम की सूची में करीब 125 ऐसे जर्जर भवन हैं जिन्हें ढहाने के लिए चिह्नित किया जा चुका है। इसमेें ज्यादातर मकान भेलूपुर, आदमपुर और कोतवाली जोन में हैे। यह पूरा इलाका पक्के महाल का है।
किराएदारी और विवाद केचलते मकानों को ढहाया नहीं जा रहा है। जो बिना विवाद के हैँ उन्हें भी नगर निगम ढहाने की कार्रवाई नहीं कर रहा है।
नगर निगम प्रशासन किराएदारी और मामला कोर्ट का बताकर पल्ला झाड़ लेता है।
करीब सवा सौ ऐसे जर्जर भवनों में सैकड़ों परिवार रहते हैं। पक्के महाल में गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक भी है। इसके चलते जो निर्माण कराना भी चाहता है तो वह नहीं करा पाता। कुछ विवाद के कारण मामला फंसा हुआ है।
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नगर निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का कहना है कि चिह्नित भवनों को ढहाने केलिए गृहस्वामियों को कई बार नोटिस दी जा चुकी है लेकिन कहीं मुकदमा है तो कहीं किराएदारी का विवाद है। इसके चलते कार्रवाई नहीं हो पाती है।
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नगर निगम की सूची में करीब 125 ऐसे जर्जर भवन हैं जिन्हें ढहाने के लिए चिह्नित किया जा चुका है। इसमेें ज्यादातर मकान भेलूपुर, आदमपुर और कोतवाली जोन में हैे। यह पूरा इलाका पक्के महाल का है।
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किराएदारी और विवाद केचलते मकानों को ढहाया नहीं जा रहा है। जो बिना विवाद के हैँ उन्हें भी नगर निगम ढहाने की कार्रवाई नहीं कर रहा है।
नगर निगम प्रशासन किराएदारी और मामला कोर्ट का बताकर पल्ला झाड़ लेता है।
करीब सवा सौ ऐसे जर्जर भवनों में सैकड़ों परिवार रहते हैं। पक्के महाल में गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक भी है। इसके चलते जो निर्माण कराना भी चाहता है तो वह नहीं करा पाता। कुछ विवाद के कारण मामला फंसा हुआ है।
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नगर निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह का कहना है कि चिह्नित भवनों को ढहाने केलिए गृहस्वामियों को कई बार नोटिस दी जा चुकी है लेकिन कहीं मुकदमा है तो कहीं किराएदारी का विवाद है। इसके चलते कार्रवाई नहीं हो पाती है।