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वाराणसी: रामनगर रामलीला में हाथी के इस्तेमाल की नहीं ली गई थी अनुमति, तीन इंजेक्शन देकर धनराज को किया काबू

Mon, 19 Oct 2026 11:50 PM IST
किशन चौबे अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली Published by: किशन चौबे Updated Mon, 19 Oct 2026 11:50 PM IST
सार

वाराणसी के रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में हाथी के इस्तेमाल के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। रविवार को बिदके धनराज हाथी को तीन इंजेक्शन देकर काबू किया गया और रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग, हाथी मालिक के कर्मचारी और पुलिस उसकी निगरानी कर रहे हैं। 

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Varanasi: No permission was obtained for the use of an elephant in the Ramnagar Ramlila
रामनगर हाथी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला में हाथी के इस्तेमाल के लिए वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। प्रशासन के अनुसार, रामलीला में हाथी के उपयोग के लिए अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। उधर, रविवार को बिदके धनराज हाथी को आधी रात के बाद तीन इंजेक्शन देकर काबू किया गया। इसके बाद से उसे प्रभु नारायण राजकीय इंटर कॉलेज के सामने स्थित रासलीला मैदान में बांधकर रखा गया है। वन विभाग और हाथी मालिक के कर्मचारी उसकी निगरानी कर रहे हैं।

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अनुमति लेने की नहीं रही है परंपरा
दुर्ग प्रशासन के सुरक्षा अधिकारी राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रामनगर की रामलीला में हाथी के इस्तेमाल के लिए वन विभाग से अनुमति लेने की परंपरा नहीं रही है। इसी वजह से इस वर्ष भी अनुमति नहीं ली गई थी। रामलीला में काशीराज परिवार के डॉ. अनंत नारायण सिंह और उनके पूर्वजों के हाथी पर सवार होकर लीला में शामिल होने की परंपरा वर्षों पुरानी है।

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तीन इंजेक्शन देकर किया गया काबू
रविवार को बिदके धनराज हाथी को आधी रात के बाद तीन इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद उसे काबू कर रासलीला मैदान में बांध दिया गया। फिलहाल हाथी की निगरानी के लिए वन विभाग और उसके मालिक के कर्मचारियों को लगाया गया है।

थानाध्यक्ष संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि हाथी की देखरेख वन विभाग और उसके मालिक के कर्मचारी कर रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस भी समय-समय पर मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही है। उधर, हाथी को देखने के लिए मैदान में लोगों की भीड़ पहुंच रही है।

60 साल से काशीराज परिवार के पास नहीं है हाथी
रामनगर की रामलीला में शामिल होने वाले हाथी काशीराज परिवार के नहीं होते हैं। पिछले करीब 60 वर्षों से रामलीला के दौरान हाथियों को किराये पर मंगाया जा रहा है। पिछले 15 वर्षों से आजमगढ़ के तीन हाथी मालिकों के यहां से हाथी रामलीला में शामिल होने के लिए लाए जा रहे हैं।

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