Varanasi News: 20 दिन में दो डूबे, 16 महीने में 10 की मौत, कैथी घाट बना ‘डेथ जोन’; मोटरबोट-लाइफ जैकेट की मांग
Varanasi News: कैथी घाट पर 16 महीनों में डूबने से 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बीते 20 दिनों में दो हादसे सामने आए हैं। लगातार घटनाओं के बाद घाट को लोग ‘डेथ जोन’ कहने लगे हैं। घाट से चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा उपकरण गायब हैं। स्थानीय लोगों ने स्थायी गोताखोर, मोटरबोट और लाइफ जैकेट की व्यवस्था की मांग उठाई है।
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Kaithi Ghat Varanasi: गंगा किनारे चौबेपुर का कैथी घाट ‘डेथ जोन’ में बनता जा रहा है। 20 दिन में दो और 16 महीने में 10 लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। इससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि हादसे के वक्त लोगों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ स्थानीय गोताखोरों और पुलिस के भरोसे रहती है।
एनडीआरएफ को शहर से कैथी तक पहुंचने में 55 मिनट लग जाते हैं। बावजूद इसके घाट पर न तो स्थायी रेस्क्यू के इंतजाम हैं और न ही चेतावनी, सुरक्षा के पर्याप्त साधन। गंगा स्नान के दौरान काशी के ललिता घाट, चेत सिंह, केदार घाट और अहिल्याबाई घाट से भी ज्यादा मौत कैथी घाट पर दर्ज की गई है।
कैथी घाट पर रोजाना करीब दस हजार लोग स्नान, पूजा-पाठ और पिकनिक के लिए पहुंचते हैं। इनमें युवाओं और बच्चों की संख्या ज्यादा रहती है। गंगा की गहराई कई जगह ज्यादा है। बहाव तेज है। इस कारण लोग डूबने लगते हैं। हादसे के बाद स्थानीय गोताखोर सबसे पहले गंगा में उतरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर मोटरबोट, लाइफ जैकेट और प्रशिक्षित बचाव कर्मियों की स्थायी तैनाती की जानी चाहिए। इससे डूबने वालों को बचाने में मदद मिलेगी।
बनारस के घाटों पर जेटी, कैथी में नहीं : गंगा में डूबकर होनी वाली मौत पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ललिता, दशाश्वमेध, अहिल्याबाई, नमो और तुलसी घाट पर जेटी लगी है। कैथी में जेटी नहीं है। सुरक्षा के कोई उपाय या उपकरण नहीं हैं। नाव संचालन नियमों का पालन नहीं होता।
गंगा स्नान के दौरान युवक डूबा, दो घंटे बाद शव मिला
चौबेपुर के कैथी के मार्कंडेय महादेव मंदिर के कुटी घाट पर शुक्रवार सुबह गंगा स्नान के दौरान गणपत प्रजापति (35) की डूबने से मौत हो गई। वह गाजीपुर का रहने वाला था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से करीब दो घंटे बाद उसका शव बाहर निकलवाया।
जहांपुर सैदपुर भीतरी निवासी गणपत प्रजापति अपने साथियों सतीश और चंदन प्रजापति के साथ सुबह मंदिर दर्शन-पूजन करने आया था। दर्शन के बाद तीनों गंगा स्नान करने घाट पर पहुंचे। दोस्तों के मुताबिक स्नान के दौरान गणपत का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। साथियों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह डूब गया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। गणपत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था।
परिवार में पत्नी रेखा, बेटा सत्यम और पांच वर्षीय बेटी शिवांगी है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ महीने में कुटी घाट पर डूबने की घटनाएं ज्यादा हुई हैं। घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पिलर तक पानी कम गहरा रहता है, लेकिन आगे अचानक गहराई बढ़ जाती है। चौबेपुर के प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार सोनकर ने बताया कि गहरे पानी में जाने से युवक डूबा और उसकी मौत हो गई। इसकी सूचना परिजनों को दी गई है।