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Varanasi News: बच्चों में सांस संबंधी बीमारी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन, इलाज पर चर्चा; दिए गए टिप्स

Sun, 21 Jun 2026 12:45 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 21 Jun 2026 12:45 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी में बच्चों में सांस संबंधी बीमारियों पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ हुआ। देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उपचार, रोकथाम और नई चिकित्सा पद्धतियों पर चर्चा की। इस दौरान डॉ. नीलम ने कहा कि आंत में मौजूद लगभग 100 ट्रिलियन सूक्ष्मजीव प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाते हैं और बच्चों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Varanasi News Two-day national conference respiratory diseases in children treatment discussed
अधिवेशन में शामिल डाॅ. नीलम और अन्य लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: एसोसिएशन ऑफ यूपी रेसिपरेटरी चैप्टर की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का भारतीय बाल अकादमी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नीलम मोहन ने उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आंत में लगभग 100 ट्रिलियन से अधिक सूक्ष्म जीव रहते हैं, जो हमारे प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करते हैं। 

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इस दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों में अस्थमा संबंधी समस्या के कारण, इलाज पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रदूषण के साथ मोटापा से भी बच्चों में दमा का खतरा बढ़ता है। ऐसे में प्रदूषण से बचाव के साथ संतुलित आहार पर ध्यान देना होगा। 
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नदेसर स्थित एक होटल में उद्घाटन समारोह में डॉ. नीलम ने कहा कि लंबे समय तक लोग यही मानते रहे कि आंत और फेफड़े दो अलग-अलग अंग हैं। लेकिन आधुनिक विज्ञान ने सिद्ध किया है कि आंत में रहने वाले सूक्ष्म जीव (माइक्रोबायोन) और फेफड़ों का स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़ा है। डॉ. एम सिंगारवेलू (अध्यक्ष निर्वाचित) ने बच्चों में बढ़ते एलर्जी चिंता व्यक्त किया और प्रदूषण को रोकने की जरूरत पर बल दिया। महासचिव डॉ. रुचिरा गुप्ता जंक फूड के दुष्प्रभाव को बताया।

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मुख्य आयोजक सचिव डॉ. अशोक राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वाराणसी में बढ़ते वायु प्रदूषण के लिए हर घर पेड़ योजना शुरू करने के लिए आह्वान किया। तकनीकी सत्रों में चर्चा के दौरान विशेषज्ञों में डॉ. एनके सुब्रमण्यम, डॉ. एस नागभूषण नेबताया कि भारत में विभिन्न अध्ययनो के अनुसार 10-15 प्रतिशत बच्चों में दमा पाया गया। 

विश्वस्तर पर भी एक मेटा अनालसिस में 10-20 प्रतिशत बच्चों में दमा पाया गया। वायु प्रदूषण, तंबाकू का धुंआ, धूल, एलर्जी तथा वायरल संक्रमण प्रमुख कारक होते हैं। बार बार खांसी, विशेषकर रात में या दौड़ने पर खाँसी आना भी दमा का लक्षण हो सकता है। कहा कि समय पर पहचान और सही उपचार से अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं और उनकी पढ़ाई पर भी प्रभाव नहीं पड़ता है। 

डॉ. जयंत जोशी ने बताया कि वायु प्रदूषण आज बच्चों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी पर्यावरणीय खतरों में से एक है। इस दौरान आयोजक सचिव डॉ. डीएम गुप्ता, संचालन आयोजक सचिव डॉ. आलोक सी भारद्वाज ने किया।

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