{"_id":"69a0902129156455cf097f4a","slug":"varanasi-news-presentation-of-shaydi-and-ghazal-in-bhu-up-news-spandan-in-bhu-2026-02-26","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: अर्ज किया है, चाहत नहीं मिलती...कोई हुनर न हो तो शोहरत नहीं मिलती, शायरी और गजल की प्रस्तुति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: अर्ज किया है, चाहत नहीं मिलती...कोई हुनर न हो तो शोहरत नहीं मिलती, शायरी और गजल की प्रस्तुति
Fri, 27 Feb 2026 05:57 AM IST
Aman Vishwakarma
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Aman Vishwakarma
Updated Fri, 27 Feb 2026 05:57 AM IST
सार
Spandan: महामना की बगिया में स्पंदन में छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। इसके साथ ही एंफीथियेटर ग्राउंड में गजल और शायरी सुनकर सभी मंत्र मुग्ध हो गए।
विज्ञापन
स्पंदन में झूमते छात्र-छात्राएं।
- फोटो : संवाद
विस्तार
Varanasi News: बीते पांच दिनों तक संगीत और नृत्य पर झूम रहा बीएचयू बृहस्पतिवार को शायरी और गजल के बीच दीवाना नजर आया। स्पंदन समापन के अगले दिन बीएचयू के एंफीथियेटर ग्राउंड में बृहस्पतिवार को शायरों की महफिल सजी।
विज्ञापन
मंच पर कवयित्री डॉ. मीनाक्षी दुबे आईं और अर्ज किया कि चाहत नहीं मिलती, दौलत नहीं मिलती, कोई हुनर न हो तो शोहरत नहीं मिलती...। उनकी यह गजल सुन युवा दर्शकों की खूब तालियां और वाहवाहियां निकलीं। फिर जब कुमार विकास दर्शकों को प्रेम के विरह और इंतजार की दुनिया में लेकर गए। उन्होंने सुनाया, ये सर्दी बीत जाएगी, क्या इसके बाद आओगे, हमदम बताओ कब इलाहाबाद आओगे...।
विज्ञापन
देवमणि पांडेय ने शेर पेश किया, आदमी पूरा हुआ तो देवता हो जाएगा, ये जरूरी है कि उसमें कुछ कमी बाकी रहे...। मुख्य अतिथि कवि जगदीश पंथी ने पूरे एंफीथियेटर ग्राउंड को फागुनी रंग में भर दिया। फागुन आने वाला है..., चइती फसल गदेल..., फगुनवा गांव में आइल... फिर रुनक झुनक.. बड़ा निक लागे ननद तोरे गऊआ... जैसे लोकगीत सुनाकर दर्शकों को गांव की होली की याद दिला दी। धन्यवाद ज्ञापन डीन प्रो. रंजन कुमार सिंह ने दिया। मंच पर स्पंदन के विजेता कवियों को सम्मानित भी किया गया। चार में से तीन स्थान छात्राओं को ही मिला।
विज्ञापन
इन्होंने भी सुनाईं शायरियां
- कवि वशिष्ठ अनूप : परख इंसान की होती है अक्सर दो ही मौके पर, कहीं छोड़ी नहीं खुद्दारी, कहीं झुकना नहीं छोड़ा।
- शायर मनीष बादल : जो था पहला गुल खिला, बस वो खिला है आज तक, बस तभी से शायरी का सिलसिला है आज तक।
- युवा शायर अंकित मौर्य : कोई सवाल जिंदगी का हल नहीं हुआ, पढ़ने में सारी उम्र गंवाने के बावजूद।
- डॉ. विनम्र सेन सिंह : नई डगर नया सफर चुनते हैं, चलते हैं रोज।